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मेला अधिकारी दीपक रावत व महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने की महंत हरिगिरी से कुंभ मेले पर चर्चा

ब्यूरो।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरिगिरी महाराज के साथ कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत व श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने महाकुंभ मेले को लेकर व्यवस्थाओं पर चर्चा की। चर्चा के दौरान महंत हरिगिरी महाराज ने कहा कि महाकुंभ मेला करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है। देश दुनिया से श्रद्धालु भक्त महाकुंभ मेले में गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। धर्मनगरी में होने वाला महाकुंभ मेला अद्भूत होना चाहिए।

राज्य की त्रिवेंद्र सरकार कुंभ मेले को लेकर स्थायी कार्यो पर अधिक से अधिक जोर दे। उन्होंने कहा कि आधे अधूरे निर्माण कार्यो को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। आश्रम अखाड़ों मठ मंदिरों में निवास कर रहे संतों से महाकुंभ मेले की व्यवस्थाओं पर विचार विमर्श करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों के सौन्दर्यकरण के कार्य तेजी के साथ किया जाना नितांत आवश्यक है। कुंभ क्षेत्र में संतों महापुरूषों की सुविधाओं के लिए बिजली, पानी, शौचालय आदि की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाए। महाकुंभ मेले में आने वाले यात्री श्रद्धालुओं के लिए वाहन पार्किंग की सुविधाओं को भी सुनिश्चित किया जाना नितांत जरूरी है।

संतों महापुरूषों के सानिध्य में महाकुंभ मेला अवश्य ही निर्विघ्न संपन्न होगा। महंत हरिगिरी महाराज ने कहा कि 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक से पूर्व अखाड़ा परिषद सभी संत महापुरूषों व सन्यासियों के साथ श्री गंगा सभा के तत्वावधान में हरकी पैड़ी ब्रहमकुण्ड पर पूजा अर्चना करेगी। कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत ने कहा कि लगातार अखाड़ों के संतों महंतों से व्यवस्थाओं को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर अधीनस्थों को भी दिशा निर्देश समय समय पर दिए जा रहे हैं। महाकुंभ मेले के स्थायी कार्यो को अधिक से अधिक किया जाएगा। जिससे धर्मनगरी की जनता को भी लाभ मिल सकेगा।

गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि महाकुंभ मेले में गंगा सभा अर्से से निर्णायक भूमिका निभाती चली आ रही है। महाकुंभ मेले के विकास कार्य शहर की जनता के अनुरूप ही किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा घाटों के सौन्दर्यकरण के कार्यो में तेजी लायी जाए। साथ ही मठ मंदिरों, पौराणिक सिद्ध पीठों की भव्यता व आलोकिकता को बनाए रखने के लिए कार्य योजनाएं बनायी जाएं। हरकी पैड़ी की व्यवस्थाओं को दुरूस्त किया जाए। जिससे संत महापुरूषों को महाकुंभ मेले में होने वाले शाही स्नानों में किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। उन्होंने कहा कि महंत हरिगिरी महाराज के अनुभव से ही महाकुंभ मेला सकुशल संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रदूषण मुक्ति के प्रयास मिल जुल कर ही करने होंगे। गंगा हमारी आस्था का केंद्र बिन्दु है। मोक्ष दायिनी मां गंगा के संवर्द्धन, संरक्षण में सभी को अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। इस दौरान कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत व गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने महंत हरिगिरी से आशीर्वाद लिया।

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