Property Fraud हरिद्वार के नामी प्रोपर्टी डीलर पति पत्नी के खिलाफ करीब नौ करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मुकदमा सिडकुल थाने में दर्ज कराया गया है। आरोप है कि यूपी के एक कारोबारी से जमीन में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए निवेश कराए लेकिन बिना पूछे खरीदी गई जमीन को बेच दिया और उसका पैसा भी नहीं लौटाया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। Property Fraud
कौन है प्रोपर्टी डीलर पति पत्नी
सिडकुल पुलिस ने बताया कि शिवालिक नगर फेस-3 निवासी रतन कुमार पांडेय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं और करीब 12 वर्षों से हरिद्वार में निवास कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात ज्वालापुर स्थित मॉडल कॉलोनी निवासी आशीष विरमानी और उनकी पत्नी मानसी विरमानी से हुई। दोनों ने खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताते हुए जमीन खरीद-फरोख्त में साझेदारी का प्रस्ताव दिया।
कानून का दिया हवाला
आरोप है कि उत्तराखंड के भूमि कानून का हवाला देते हुए आरोपियों ने कहा कि बाहरी व्यक्ति होने के कारण अधिक जमीन सीधे उनके नाम नहीं खरीदी जा सकती, इसलिए जमीन मानसी विरमानी के नाम से खरीदी जाएगी और बाद में आधा हिस्सा उन्हें दे दिया जाएगा। बताया गया कि 19 जनवरी 2021 को इस संबंध में एक नोटरी एग्रीमेंट भी किया गया था, जिसमें जमीन की खरीद में दोनों पक्षों की बराबर हिस्सेदारी तय की गई थी।
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रोशनाबाद और सिडकुल में खरीदी जमीनें
पीडित ने बताया कि सिडकुल इंडस्ट्रियल एरिया के कई खसरा नंबरों की करीब 30 बीघा जमीन और राजा बिस्कुट चौक के सामने करीब ढाई एकड़ व्यावसायिक जमीन में संयुक्त रूप से निवेश किया गया था। आरोप है कि बाद में आरोपियों ने इन जमीनों को करीब 18 करोड़ रुपये में बेच दिया, जबकि इसमें पीड़ित की आधी हिस्सेदारी करीब नौ करोड़ रुपये की थी।
जब पीड़ित को जमीन बिकने की जानकारी मिली और उन्होंने अपने हिस्से की रकम मांगी तो आरोपियों ने भुगतान में असमर्थता जताते हुए सलेमपुर स्थित आईपी-2 में 850 वर्गमीटर का एक प्लॉट देने की बात कही और बाकी करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये जल्द देने का आश्वासन दिया।
पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद भी रकम नहीं दी गई। 30 जनवरी 2026 को उन्हें पता चला कि जिस प्लॉट को उनके हिस्से के रूप में दिया गया था, उस पर भी आरोपी कब्जा करने की नीयत से जेसीबी से नींव की खुदाई करवा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली।