अतीक साबरी:-
पिरान कलियर। नगर पंचायत पिरान कलियर में विकास के नाम पर सरकारी धन की किस कदर बंदरबांट की जा रही है, इसका जीता-जागता प्रमाण जल निगम द्वारा लगाए गए हैंडपंपों की बदहाली है। पिछले वर्ष नगर पंचायत ने जनता की प्यास बुझाने के नाम पर करीब 50 हैंडपंपों को रिबोर कराने का दावा किया था, जिस पर लगभग एक करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया। लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही का आलम यह है कि एक साल का वक्त भी पूरा नहीं हुआ और अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।
धरातल पर भ्रष्टाचार की ‘रीबोरिंग’, जनता प्यासी:-स्थानीय ग्रामीण प्रवेज, एजाज, इंतजार, सलमान, असलम, अफसर और सद्दाम ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रिबोरिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी के चलते करोड़ों रुपये ‘पानी’ में बह गए। आज हालत यह है कि स्थानीय निवासियों से लेकर दरगाह आने वाले हजारों राहगीर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि सरकारी फाइलों में हैंडपंपों को दुरुस्त दिखाकर बजट ठिकाने लगा दिया गया।
जिम्मेदारों की चुप्पी, जनता में भारी आक्रोश:-हैंडपंपों की इस दुर्दशा ने नगर पंचायत की ईमानदारी की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का कहना है कि क्या एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सिर्फ इसलिए खर्च की गई थी कि हैंडपंप साल भर भी न चल सकें? सद्दाम और एजाज ने दो टूक कहा कि यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की लूट है। भीषण गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन चैन की नींद सोया हुआ है।
अधिकारी का अजीब तर्क: शिकायत मिलेगी तो करेंगे काम:-हैरानी की बात यह है कि जहाँ करोड़ों का घोटाला साफ नजर आ रहा है, वहीं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी कुलदीप चौहान का कहना है कि उन्हें अभी तक इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। अधिकारी का यह तर्क गले नहीं उतरता कि क्या करोड़ों की योजना की गुणवत्ता जांचने के लिए भी उन्हें जनता की शिकायत का इंतजार है?
ईओ ने अब जाकर हैंडपंपों को दिखवाने और सही कराने की बात कही है, लेकिन जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहती है।
उच्च स्तरीय जांच की उठ रही मांग:-पिरान कलियर की जनता ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन हैंडपंपों को पूरी क्षमता के साथ ठीक नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुली लूट पर क्या संज्ञान लेता है या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी धूल फांकती रह जाएगी।