सीतापुर रेल हादसे पर चुप्पी क्यों साध गए रेलवे के अफसर, क्या मिल पाएगा इंसाफ

चंद्रशेखर जेाशी।
पिछले दिनों लक्सर से हरिद्वार के बीच डबल ट्रैक के ट्रायल के दौरान सीतापुर गांव में हुए रेल हादसे में चार युवाओं की मौत हो गई थी जिसमें रेलवे ने अपनी ओर से जांच कमेटी गठित की थी। वही पुलिस ने भी इस मामले में रेलवे प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। वहीं जिला प्रशासन ने भी अपनी ओर से पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए थे। हालांकि पंद्रह दिनों के भीतर जांच पूरी करनी थी लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।लेकिन इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि रेलवे ने अपनी जांच में क्या पाया है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर आयोजित प्रेस वार्ता में डीआरएम रेलवे तरुण प्रकाश से जब ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ ना कहना ही मुनासिब समझा। उन्होंने कहा कि इस मामले में वो मजिस्ट्रियल जांच का इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद ही वो कुछ कह सकते हैं। इसके बाद जब पूछा गया कि रेलवे की अपनी जांच क्या कहती है तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और जांच रिपोर्ट का इंतजार कहने की बात करते हुए सवाल को टाल गए।

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पुलिस क्या कहती है
सीतापुर के चार नौजवानों की दर्दनाक मौत के मामले में परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस से भी जांच के बारे में पूछा गया। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी ने बताया कि ​फिलहाल जांच जारी है और मजिस्ट्रयल जांच अभी आना बाकी है इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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क्या कहता है प्रशासन
वहीं जब जिला प्रशासन की मजिस्ट्रियल जांच के बारे में पूछा गया तो जिलाधिकारी हरिद्वार सी रविशंकर ने बताया जांच की जा रही है और जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। जब जांच अधिकारी एसडीएम सदर गोपाल सिंह चौहान से इस बाबत जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कई बार फोन करने के बाद भी जवाब देना उचित नहीं समझा। लिहाजा, सवाल ये उठता है कि ट्रायल के दौरान जिन चार युवाओं की जान गई थी वो किसकी लापरवाही थी। क्या इन चार युवाओं केा इंसाफ मिल पाएगा। क्या कभी पता लग पाएगा कि हादसे का जिम्मेदार कौन था। ये सवाल हर किसी के जहन में है और चारों युवाओं के परिजन भी इसी का इंतजार कर रहे हैं।

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