कलियर थाना: नई कमान के सामने पुरानी चुनौतियों का अंबार, क्या ‘स्पेशलिस्ट’ भंडारी सुलझा पाएंगे उलझी गुत्थियां?

कड़वा सच:- ​पिरान कलियर।

कहते हैं ‘नया मुल्ला प्याज़ ज्यादा खाता है’, लेकिन पिरान कलियर के नवागत इंस्पेक्टर कमल मोहन भंडारी के लिए यह मुहावरा नहीं, बल्कि ‘अग्निपरीक्षा’ है। पूर्व थाना प्रभारी रविंद्र कुमार के कार्यकाल में अपराधियों ने जिस तरह पुलिसिया इकबाल का ‘पलीता’ निकाला, उसकी राख अब भंडारी के दामन पर गिरने को तैयार है।​कलियर की गलियों में चर्चा आम है कि रविंद्र कुमार के राज में पुलिस सिर्फ ‘कागजी घोड़े’ दौड़ाती रही, जबकि शातिर अपराधी पुलिस की नाक के नीचे से वारदातों को अंजाम देकर ‘हवा’ हो गए। अब जनता के मन में एक ही सवाल है— क्या भंडारी साहब के पास कोई जादुई छड़ी है या ये 10 कांड भी ‘अनट्रेस’ की भेंट चढ़ जाएंगे?​

वर्दी पर लगा ‘दाग’ कब धुलेगा:-भीम आर्मी के हंगामे और धनौरी चौकी में हुई मारपीट ने वर्दी की जो किरकिरी कराई, उसकी टीस आज भी पुलिस महकमे में है। क्या नए कोतवाल कानून का राज कायम कर पाएंगे?​

अपराधियों का ‘सेफ हेवन’ बना कलियर:-जिस्मफरोशी का धंधा हो या ट्रांसफार्मर चोरी, कलियर क्षेत्र अपराधियों के लिए ‘पिकनिक स्पॉट’ जैसा बन गया है। मुख्य आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं, मानो उन्हें कानून का कोई खौफ ही न हो।​

सिसकती मानवता और बेबस बाप:नहर किनारे मिले भ्रूण और राहुल हत्याकांड में पुलिस की ‘शून्य’ कार्रवाई ने आम आदमी का भरोसा पुलिस से उठा दिया है। राहुल के पिता की डबडबाई आंखें आज भी थाने की चौखट पर न्याय की भीख मांग रही हैं।​

रविंद्र कुमार की विदाई के बाद अब कलियर पुलिस के पास ‘बहाना’ बनाने का वक्त खत्म हो चुका है। कमल मोहन भंडारी को यह समझना होगा कि जनता को ‘प्रेस नोट’ नहीं, ‘परिणाम’ चाहिए। अगर इन 10 बड़े कांडों की गुत्थी नहीं सुलझी, तो जनता समझ लेगी कि सिर्फ चेहरे बदले हैं, चरित्र नहीं!