बुजुर्गों के द्वार पहुँचा न्याय: ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ ने घर जाकर सुनी फरियाद, मौके पर ही किया मुकदमों का निस्तारण

अतीक साबरी:-​

रुड़की (NSG ब्यूरो): वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के सम्मान व सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रुड़की प्रशासन ने एक बड़ी नजीर पेश की है। उप जिलाधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ ने ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007’ के तहत न्यायालय में विचाराधीन मामलों में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बुजुर्गों के घर जाकर सुनवाई की। दरअसल, कई मामलों में विपक्षीगण (पुत्र व रिश्तेदार) न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे थे, जिससे बुजुर्गों को न्याय मिलने में देरी हो रही थी। इसी के दृष्टिगत एसडीएम ने स्वयं पीड़ित बुजुर्गों के निवास स्थल पर जाकर मौके पर ही वादों का निस्तारण कर उन्हें त्वरित कानूनी सहायता प्रदान की।​

प्रशासनिक टीम ने ग्राम बेलडा निवासी श्रीमती जरीफन, पश्चिमी अंबर तालाब निवासी सुनील वर्मा, आकाशदीप कॉलोनी निवासी श्रीमती किरणलता, मोहनपुर मोहम्मदपुर निवासी रामशरण और ग्राम तांशीपुर निवासी श्रीमती सरस्वती के घर पहुंचकर उनकी पीड़ा सुनी। मौके पर ही उपस्थित पुत्रों, पुत्रवधुओं और परिजनों को न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए कि बुजुर्गों के साथ किसी भी प्रकार का अभद्र व्यवहार न किया जाए और उनके जीवन यापन व भरण-पोषण में पूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

एसडीएम ने आदेश पारित किया कि बुजुर्गों के भोजन और चिकित्सकीय उपचार के लिए बच्चे प्रतिमाह आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराएंगे। सुरक्षा के लिहाज से संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि इन बुजुर्गों का विवरण दैनिक पंजिका में दर्ज कर समय-समय पर उनसे संपर्क कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

​उप जिलाधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ ने ‘न्यूज सर्विस ग्लोबल’ (NSG) को बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान चलाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों की उपेक्षा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि बच्चे अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं, तो प्रशासन उनके विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। बुजुर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सम्मान दिलाने के लिए तहसील प्रशासन लगातार इस प्रकार की त्वरित कार्यवाही जारी रखेगा।