पिरान कलियर: पिरान कलियर की रूहानी फिजाओं में बारूद का धुआं घोलने की हिमाकत की गई है। बाबा जिलानी के मेले की आड़ में पंजाब से आए कुछ अराजक तत्वों ने दरगाह साबिर पाक के भीतर जिस तरह का ‘हुड़दंग’ मचाया, उसने न केवल दरगाह की पवित्रता को ठेस पहुँचाई है, बल्कि यहाँ की सुरक्षा को भी ठेंगा दिखा दिया है।
जायरीनों की जान आफत में, वजू खाने तक पहुँचा ‘बारूद’बताया जा रहा है कि पंजाब से आए इन तथाकथित जायरीनों के गुट ने दरगाह के संवेदनशील परिसर के अंदर ही पटाखे फोड़ने शुरू कर दिए। हद तो तब पार हो गई जब जलते हुए पटाखे सीधा वजू खाने में जा गिरे, जहाँ अकीदतमंद इबादत की तैयारी कर रहे थे।
मासूम जायरीनों के ऊपर पटाखे फटने से वहां भगदड़ मच गई। अगर कोई बड़ी आगजनी होती या किसी की जान जाती, तो क्या पंजाब से आए ये हुड़दंगी उसकी जिम्मेदारी लेते?
मेले की आड़ में ‘अराजकता’ का नंगा नाबाबा जिलानी के मेले में शामिल होने के नाम पर आए इन लोगों ने दरगाह को पिकनिक स्पॉट समझ लिया है। स्थानीय लोगों और आस्थावानों का कहना है कि इन हुड़दंगियों को न तो दरगाह के अदब का ख्याल है और न ही कानून का खौफ। आस्था की आड़ में इस तरह की ‘दबंगई’ पिरान कलियर के इतिहास में एक काला धब्बा है।
दरगाह प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद पर सवाल:-सबसे बड़ा सवाल दरगाह के सुरक्षा तंत्र पर है:
सुरक्षा घेरा या कागजी किला? भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद आतिशबाजी का सामान अंदर कैसे पहुँचा क्या गेट पर चेकिंग सिर्फ गरीब जायरीनों की होती है
वर्दीधारियों की मेहरबानी: जब हुड़दंगी पटाखों से लोगों की जान जोखिम में डाल रहे थे, तब वहां तैनात सुरक्षाकर्मी क्या इन ‘मेहमानों’ की खातिरदारी में लगे थे,मैनेजमेंट की लापरवाही दरगाह प्रशासन की ढिलाई के कारण ही आज बाहरी लोग यहाँ आकर हुड़दंग मचाने की हिम्मत कर रहे हैं।
आस्थावन लोगो ने दरगाह प्रशासन से मांग की है ‘बाहर करो ऐसे हुड़दंगियों को’पवित्र दरगाह के भीतर ऐसी ओछी हरकत से स्थानीय निवासियों और जायरीनों में भारी उबाल है। लोगों की साफ मांग है कि:सीसीटीवी कैमरे चेक कर इन पंजाबी हुड़दंगियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले सुरक्षाकर्मियों पर सख्त एक्शन हो।दरगाह की मर्यादा भंग करने वालों की पिरान कलियर में एंट्री बैन की जाए।”
हम यहाँ सुकून और दुआ के लिए आते हैं, धमाकों के लिए नहीं। अगर दरगाह प्रशासन इन पंजाबी गुंडों पर लगाम नहीं लगा सकता, तो सुरक्षा का ढोंग बंद कर दे।” — एक चश्मदीद जायरीन