अतीक साबरी:-
पिरान कलियर (बेडपुर चौक)। इसे प्रशासन की बेशर्मी कहें या माइनिंग विभाग की मिलीभगत, लेकिन बेडपुर चौक स्थित माइनिंग चेकपोस्ट अब हादसों का केंद्र बन चुका है। आज एक बार फिर सोहलपुर की ओर से आ रहा बजरी से लदा एक ओवरलोड ट्रेला अनियंत्रित होकर माइनिंग चेकपोस्ट के ठीक सामने गेहूं के खेत में पलट गया। गनीमत रही कि उस वक्त खेत में कोई मौजूद नहीं था, वरना प्रशासन को लाशें गिननी पड़तीं। यह हादसा माइनिंग विभाग और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
चेकपोस्ट के ठीक नाक के नीचे ओवरलोड वाहनों का इस कदर बेखौफ होकर पलटना साफ इशारा करता है कि यहाँ नियमों का नहीं बल्कि खनन माफियाओं के रसूख का सिक्का चलता है। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील प्रशासन और माइनिंग विभाग हाथ पर हाथ धरे किसी बड़े नरसंहार का इंतजार कर रहे हैं। सोहलपुर रोड पर रात-दिन ओवरलोड वाहनों का तांडव जारी है, जिससे सड़कों की हालत खस्ता हो चुकी है और राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस चेकपोस्ट का काम अवैध खनन और ओवरलोडिंग रोकना है, उसी के सामने ये वाहन बेकाबू होकर पलट रहे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल ऑफिस में बैठकर कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए हैं?
आखिर क्यों बार-बार हो रहे हादसों के बाद भी इन ‘मौत के सौदागरों’ पर लगाम नहीं कसी जा रही? जनता अब इस प्रशासनिक नपुंसकता से तंग आ चुकी है। अगर वक्त रहते सड़कों पर दौड़ते इन ‘ओवरलोड यमराजों’ और सुस्त पड़े सिस्टम पर कार्रवाई नहीं हुई, तो गुस्साए ग्रामीण सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

