Mandan Kaushik and minister Swami yatishwaranand who is better

इन मामलों में मदन कौशिक से बेहतर मंत्री साबित हो रहे हैं स्वामी यतीश्वरानंद, क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार

चंद्रशेखर जोशी।
दो बार के मंत्री और त्रिवेंद्र सरकार में नंबर दो की पोजीशन रखने वाले या यूं कहें कि सरकार चलाने वाले हरिद्वार से चार बार के विधायक मदन कौशिक पर हाल ही में उनकी जगह बनाए गए मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने चंद दिनों में ही अपनी आमजन के दिलों दिमाग पर अपनी छाप छोडने का प्रयास किया है। बतौर मंत्री उनके कामों को सराहा भी जा रहा है और कई मामलों में तो स्वामी यतीश्वरानंद मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से बीस साबित हो रहे हैं। स्वामी यतीश्वरानंद की परफोरमेंस के बारे में क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार….

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स्वामी यतीश्वरानंद के ये प्रयास रहे अच्छे
वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी बताते हैं कि स्वामी यतीश्वरानंद ने बहुत कम समय में जनता से सीधा संवाद बनाने का प्रयास किया है और उसमें काफी हद तक सफल भी होते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने राशन डीलरों की मनमानी और कालाबाजारी से जूझ रही जनता के लिए अपने फोन नंबर जारी किए, जो बहुत अच्छा प्रयास है। इसके अलावा उन्होंने हरिद्वार के विकास और अपने मंत्रालयों के संबंध में जनता से सुझाव मांगे जो उन्हें मदन कौशिक से अलग करता है। मुझे नहीं लगता है कि मदन कौशिक ने दो बार मंत्री रहते हुए कभी ऐसा प्रयास किया था या नहीं। हालांकि मदन कौशिक को अनुभव ज्यादा है और उन्हें अफसरशाही आसानी से बेवकूफ नहीं बना सकती है। लेकिन ये बडा सवाल है कि स्वामी यतीश्वरानंद को सरकार और अफसरों का कितना साथ मिल पाता है। हालांकि स्वामी यतीश्वरानंद बेलाग दो टूक कहने वाले नेता हैं।

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बतौर प्रभारी मंत्री सबसे अव्वल रहे स्वामी यतीश्वरानंद
वरिष्ठ पत्रकार कुणाल दरगन बताते हैं कि हरिद्वार जैसे बडी आबादी वाले जनपद में मंत्री बने तो उन्होंने अपनी विधानसभा तक खुद को सीमित नहीं रखा। स्वामी यतीश्वरानंद ने कोरोना की दूसरी लहर के बीच हरिद्वार ग्रामीण से लेकर नारसन तक दौरा करने से पीछे नहीं हटे। यही नहीं वो बेस अस्पताल में कोरोना मरीजों का हाल जानने के लिए पीपीई किट पहन कोविड वार्ड पहुंच गए। यही नहीं उन्होंने उत्तरकाशी जनपद में बतौर कोरोना प्रभारी मंत्री होने के नाते सबसे पहले दौरा किया और तीन दिन वहां गुजार कर व्यवस्था का जायजा लिया। इसके उलट पुराने मंत्री मदन कौशिक का अधिकतर समय या तो देहरादून में बीता या फिर वो हरिद्वार नगर में सीमित रहे। हालांकि, मदन कौशिक समस्या सबकी सुनते थे लेकिन स्वामी यतीश्वरानंद जनता तक पहुंच बनाने में मदन कौशिक से आगे निकल गए हैं।

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किसानों की समस्या को समझा और गन्ना भुगतान कराया
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणी डोभाल बताते हैं कि मदन कौशिक शहरी विकास मंत्री होने के बावजूद हरिद्वार नगर निगम को सही तरह से चलाने में नाकाम रहे, बल्कि उन पर अफसरों के जरिए बाधा डालने के आरोप भी लगते रहे। हालांकि ये अलग बात है कि पर्दे के पीछे कांग्रेस और भाजपा ने कई मामलों में गजब की एकता दिखाई है। लेकिन स्वामी यतीश्वरानंद ने अपने मंत्रालय में जिम्मेदारी संभालते ही किसानों के गन्ना भुगतान के लिए दो सौ करोड रुपए जारी करवा दिए। ये पहली बार हुआ है कि सरकारी चीनी मिलों का पैसा समय पर भुगतान कर दिया गया। वहीं निजी मिलों के भुगतान के लिए भी जून से पहले का टारगेट रखा गया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि स्वामी यतीश्वरानंद अपने मंत्रालय के कामकाज भी बखूबी कर रहे हैं। जबकि मदन अपने गृह सीट पर ही नाकाम साबित हुए हैं।

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