Covid curfew extended till july six in uttarakhand

कुंभ का कोरोना जांच घोटाला: हरिद्वार का हाउस नंबर 5 क्यों आया चर्चा में, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

विकास कुमार।
हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान हुए कोरोना टेस्टिंग घोटाले में शुरुआती जांच के बाद कई चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। करीब सोलह सौ पन्नों की इस जांच रिपोर्ट में करीब एक लाख से अधिक रिपोर्ट के फर्जी होने के के प्रमाण मिले हैं। जिनको हरिद्वार में टेस्ट नहीं किया गया बल्कि आधार कार्ड और फोन नंबर लेकर नेगेटिव रिपोर्ट चढ़ा दी गई। हालांकि शुरुआती जांच के बाद मिले घोटाले के सबूतों के देखते हुए स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने जिलाधिकारी हरिद्वार सी रविशंकर को विस्तृत जांच करने के लिए बोला है। लेकिन यह मेला प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है कि आखिर कैसे कुंभ मेले जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में कोरोना टेस्टिंग घोटाला किया गया।
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हरिद्वार का हाउस नम्बई 5, जहां हुए 530 टेस्ट

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक शुरुआती जांच जो देहरादून में की गई है उसमें एक ही मोबाइल नंबर पर 700 से अधिक सैंपल दर्शाए गए हैं। यही नहीं हरिद्वार के हाउस नंबर 5 का वह घर भी चर्चा में है जहां से करीब 530 सैंपल जांच के लिए लिए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में 1600 की इस रिपोर्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वही रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात और अन्य राज्यों से भी सैंपल दर्शाए गए हैं। उनके या तो नंबर फर्जी हैं या फिर वह जो लोग जिनके टेस्ट हुए हैं वह कभी हरिद्वार आए ही नहीं। 

—–-हरिद्वार सीडीओ कर रहे हैं जांच

वही इस मामले की जांच हरिद्वार के सीडीओ सौरभ गहरवार कर रहे हैं जिन्हें 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देनी है। वही जिस लैब और एजेंसी को की जांच रिपोर्ट में यह घोटाला सामने आया है। वह कुंभ मेला के स्वास्थ विभाग ने हायर की थी। जिसको ठेका देने पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मेला स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन सिंह सेंगर ने बताया के मैक्स कॉरपोरेशन नाम की संस्था को कुंभ के दौरान टेस्टिंग के लिए ठेका दिया गया था। यह संस्था नालवा लैब हिसार और लालचंदानी लैब्स दिल्ली से टेस्टिंग करा रही थी। कुंभ के दौरान इस संस्था ने करीब सवा लाख टेस्टिंग की है। जबकि कुंभ मेला स्वास्थ विभाग और जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार करीब चार लाख लोगों की टेस्टिंग कुंभ के दौरान हुई है। इससे साफ है की नलवा और लालचंदानी लैब्स जिनके टेस्ट में फर्जीवाड़ा पाया गया है क्या कोई कार्रवाई हो पाएगी या फिर पूरे मामले पर लीपापोती की जाएगी। 
जिलाधिकारी श्री रविशंकर ने बताया की अभी किसी लाइफ का पैसा नहीं दिया गया है और बजट को रोकने के आदेश किए गए हैं जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आईसीएमआर से मान्यता प्राप्त लैब को ही टेस्टिंग का जिम्मा दिया जाना था तो फिर थर्ड पार्टी मैक्स कॉर्पोरेशन को किस आधार पर काम करने के लिए अनुमति दी गई। आपको बता दें की कुंभ मेला स्वास्थ विभाग ने 9 टेस्टिंग लैब और जिला प्रशासन ने 13 टेस्टिंग लैब को कुंभ के दौरान टेस्टिंग करने के लिए हायर किया था।

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