महा-सफाई या महज खानापूर्ति? कलियर दरगाह के नवनियुक्त CEO के सामने ‘भ्रष्टाचार का किला’ फतह करने की चुनौती-

अतीक साबरी:-​

पिरान कलियर/देहरादून।उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) मोहम्मद आरिफ ने कलियर दरगाह का प्रभार संभालते ही अपनी ‘धमक’ दिखाने की कोशिश तो की है, लेकिन उनके पहले ही फरमान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CEO ने एक प्रेस नोट जारी कर दरगाह क्षेत्र के ढाबा संचालकों और मेडिकल स्टोरों को मिलावटखोरी और नशीली दवाओं पर अल्टीमेटम दिया है।​लेकिन बड़ा सवाल यह है कि: क्या दरगाह की असली बीमारी ‘मिलावटी चाशनी’ है या वो ‘अंधा भ्रष्टाचार’ जिसने दरगाह की वित्तीय कमर तोड़ दी है?

​1. छोटे दुकानदारों पर चाबुक, मगर ‘बड़े मगरमच्छ’ बेखौफ!

​CEO ने अपने आदेश में आईपीसी की धारा 272 और 273 का डर दिखाया है। यह स्वागत योग्य है, लेकिन अकीदतमंदों का पूछना है कि उन रसूखदार ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी, जो दरगाह के करोड़ों रुपये दबाकर बैठे हैं? छोटे दुकानदार को नोटिस देना आसान है, लेकिन क्या नवनियुक्त CEO उन रसूखदारों की फाइलें खोलने का दम रखते हैं जो सालों से दरगाह की आय को दीमक की तरह चाट रहे हैं?​

2. खाली ठेके और लाखों का दैनिक नुकसान: कौन है जिम्मेदार?​दरगाह पिरान कलियर की व्यवस्था वर्तमान में वेंटिलेटर पर है। दरगाह के अधिकांश महत्वपूर्ण ठेके अब तक नहीं हुए हैं, जिसके कारण प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।​क्या CEO साहब इन खाली पड़े ठेकों को पारदर्शिता से भर पाएंगे ​या फिर ‘औचक निरीक्षण’ का खौफ दिखाकर केवल जमीनी स्तर के छोटे कामगारों को ही निशाना बनाया जाएगा?​

3. ‘सिस्टम’ की पटरी उतरी, क्या आरिफ बनेंगे ‘ट्रैक मैन’?​पिरान कलियर में अव्यवस्था का आलम यह है कि यहां जायरीनों की सुविधाओं के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि दरगाह के फंड का बड़ा हिस्सा ‘बंदरबांट’ की भेंट चढ़ जाता है। नवनियुक्त CEO के लिए सबसे बड़ी चुनौती दरगाह के प्रशासनिक ढांचे को इस ‘सिंडिकेट’ के चंगुल से आजाद कराना है।​

4. प्रेस नोट की ‘साख’ पर सवाल: क्या यह सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट है?​जानकारों का मानना है कि नए अधिकारी अक्सर अपनी छवि चमकाने के लिए छोटे मुद्दों (जैसे मिलावटखोरी) को तूल देते हैं ताकि बड़े घोटालों से ध्यान भटकाया जा सके। कलियर की जनता पूछ रही है— साहब, दूध में मिलावट तो हम देख लेंगे, पहले दरगाह की तिजोरी में जो सेंध लगी है, उसे तो भरिए!​

निष्कर्ष: अग्निपरीक्षा के दौर में मोहम्मद आरिफ​

मोहम्मद आरिफ के लिए पिरान कलियर कोई साधारण कार्यभार नहीं, बल्कि एक ‘कांटों भरा ताज’ है। यदि वे वाकई बदलाव लाना चाहते हैं, तो उन्हें ‘प्रैस-नोट’ से आगे बढ़कर रिकवरी नोटिस जारी करने होंगे। उन्हें उन ठेकेदारों को जेल भेजना होगा जो दरगाह का पैसा डकार चुके हैं।​वरना, यह प्रेस नोट भी पूर्व के अधिकारियों की तरह रद्दी की टोकरी की शोभा बढ़ाएगा और दरगाह का पैसा यूं ही लुटता रहेगा।​”कलियर शरीफ को ‘चेतावनी’ की नहीं, ‘इंसाफ’ और ‘ईमानदार रिकवरी’ की जरूरत है।”

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