who will get ticket in this election from harish rawat family

हरीश रावत अपनी राजनीतिक विरासत क्यों खड़ी नहीं कर पाए, क्या रहे कारण बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार

विकास कुमार।
सचिन पायलट, कार्ति चिदंबरम, दीपिंदर हुड्डा, मिलिंद देवरा, रणदीप सुरजेवाला, ज्योतिरादित्य सिंधिया, संजीव आर्य, काजी निजामुद्दीन, सुमित हृयदेश आदि ऐसे कई नाम हैं जो कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की राजनीतिक विरासत को आगे बढा रहे हैं, लेकिन उत्तराखण्ड सियासत की धुरी माने जाने वाले हरीश रावत केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक रहने के बावजूद अपनी राजनीतिक विरासत को अभी तक खडा नहीं कर पाए। राजनीति में बतौर कप्तान अपनी आखिरी पारी खेल रहे हरीश रावत आखिर क्यों आनंद रावत, अनुपमा रावत और विरेंद्र रावत में से किसी एक को भी स्थापित नहीं कर पाए। क्या तीनों हरीश रावत के आभामंडल के सामने खुद को साबित नहीं कर पा रहे हैं, या फिर घर की आपसी लडाई में हरीश रावत किसी एक को भी मौका नहीं दिला पा रहे हैं या फिर तीनों को हरीश रावत के नाम का फायदा होने के बजाए नुकसान उठाना पडा रहा है। क्या है कारण हमने वरिष्ठ पत्रकारों से जानने की कोशिश की….

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लीडरशिप विरासत में नहीं मिलती है
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणी डोभाल बताते हैं कि लीडरशिप विरासत में नहीं मिलती है बल्कि ये संघर्ष से आती है। मुझे लगता है कि आनंद, अनुपमा और विरेंद्र तीनों को पहले खुद को साबित करना होगा तभी हरीश रावत मौका दिला सकते हैं। हरीश रावत के लिए ये आखिरी मौका है जब वो अपनी विरासत को आगे बढाने के लिए रिस्क लें, लेकिन इस बार हालात अनुकूल नहीं लगते हैं। हालांकि हरीश रावत अपने तीनों बच्चों में से किसी एक को मौका दे सकते थे लेकिन उन्होंने अब तक ऐसा क्यों नहीं किया ये आश्चर्य वाली बात है। सवाल ये कि उनका राजनीतिक विरासत कौन होगा तो अनुपमा या आनंद में से कोई हो सकता है। हालांकि अनुपमा के चांस ज्यादा है क्योंकि राज्य महिलाओं का है और महिला होने के नाते उन्हें फायदा मिल सकता है। हरीश रावत को उत्तराखण्ड में भी चालीस प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिए जाने की वकालत करनी चाहिए।

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घर की लडाई के कारण तीनों को हुआ नुकसान
वरिष्ठ पत्रकार अवनीश प्रेमी बताते हैं कि आनंद रावत यूथ कांग्रेस के निर्वाचित अध्यक्ष थे लेकिन वो भी विधायक नहीं बन पाए। सबसे बडी बात है कि आनंद, अनुपमा और विरेंद्र को लेकर घर की लडाई। आखिर मौका मिले तो किसे मिले। हरीश रावत का इतना बडा कद होने के बाद भी वो तीनों में से किसी को मौका नहीं दिला पाए। यही कारण है​ कि हरीश रावत से लेकर उनके तीनों बच्चे भी अभी तक बहुत अच्छी सीट अपने लिए नहीं तय नहीं कर पाए।

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हरीश रावत का फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ
वरिष्ठ पत्रकार राव शफात अली बताते हैं कि हरीश रावत बडे नेता हैं और उन्होंने परिवार से ज्यादा उत्तराखण्ड के बारे में सोचा, इसलिए कहीं परिवारवाद का आरोप ना लग जाएं इसलिए उन्होंने अपनी विरासत को खडा करने से परहेज किया। दूसरा कारण ये भी है कि तीनों की आपसी लडाई। तीनों बच्चे एक साथ मंच भी साझा नहीं करते हैं और तीनों में विवाद होने के कारण हरीश रावत के सामने भी ये चुनौती है कि आखिर मौका दें तो किसे दें क्योंकि तीनों का मौका दिया नहीं जा सकता है और एक को देंगे तो दूसरा नाराज हो जाएगा। यही कारण है कि उन्होंने लोकसभा में अपनी पत्नी रेणुका रावत को चुनाव लडवाया। तीसरा कारण ये भी हरीश रावत का व्यापक अभामंडल है और खासोआम अनुपमा, आनंद और विरेंद्र को हरीश रावत की आभा जैसा आंकने का प्रयास करते हैं जो गलत है। इसलिए कभी—कभी लगता है कि हरीश रावत जैसा कद्दावर नेता होने का नुकसान तीनों को हुआ है। हालांकि भविष्य में मुझे लगता है कि आनंद या अनुपमा में से कोई उनकी विरासत को आगे बढाएगा लेकिन त​भी जबकि उन्हें मौका मिले जिसके आसार बहुत कम लग रहे हैं।

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