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चैनलों के एग्जिट पोल पर क्यों भरोसा नहीं हो रहा, क्या कहते हैं उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार

विकास कुमार/ऋषभ चौहान।
उत्तराखण्ड के एग्जिट पोल को लेकर अधिकतर बडे चैनलों ने राज्य में भाजपा सरकार की वापसी का अनुमान लगाया है। जबकि एबीपी और जीन्यूज के मुताबिक कांग्रेस आ रही है। न्यूज चैनलों के सर्वे पर कई लोगों को भरोसा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उत्तराखण्ड के पत्रकार क्या सोचते हैं और उनके मुताबिक राज्य में क्या होने जा रहा है, हमने जानने की कोशिश की।

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चैनलों के एग्जिट पोल विश्वसनीय नही
वरिष्ठ पत्रकार राव शफात अली ने बताया कि चैनलों के सर्वे कई बार गलत साबित हुए हैं। खासतौर पर उत्तराखण्ड के परिदृश्य में चैनल जो सैंपल लेते हैं या जिन लोगों से बात करते हैं वो उतने सटीक साबित नहीं हुए हैं। इस बार उत्तराखण्ड में बहुत ही कडा मुकाबला है और हालात 2012 जैसे है। जबकि किसी को पूर्ण बहुत नहीं मिला था। खासतौर पर इस बार जब किसी नेता की लहर नही थी और हर सीट पर अलग चुनाव चल रहा था। ऐसे में किसी को स्पष्ट बहुत मिल रहा है कहा नहीं जा सकता है।

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वोटर बहुत चालाक, नहीं देता मन की थाह
वहीं वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र रावत बताते हैं कि चैनलों के एग्जिट पोल पर बहुत ज्यादा यकीन नहीं किया जा सकता है। उत्तराखण्ड में सबसे ज्यादा सर्वे एबीपी ने किए हैं और वो कांग्रेस को बढत दिखा रहा है। जबकि अन्य भाजपा को। मेरा मानना है कि वोटर अब बहुत ही समझदार हो गया है, वो अपने मन की बात जाहिर नहीं करता है। कई बार ऐसा होता है कि राय लेते हुए कोई परिचित खडा हो उसके सामने कह देते हैं कि भाजपा को वोट दिया है तो कोई कांग्रेस को वोट देने की बात कर देता है। उत्तराखण्ड में जो हालात देखने को मिल रहे हैं उसके अनुसार बहुत ही करीबी मुकाबला है, स्पष्ट बहुत से सरकारी की वापसी जैसा अभी कुछ दिख नहीं रहा है।

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एग्ज्टि पोल प्रयोजित लग रहे हैं
वहीं वरिष्ठ पत्रकार महावीर नेगी बताते हैं कि चैनलों के एग्जिट पोल से लग रहा है कि भाजपा सरकार में दो तिहाई बहुमत से आ रही है। जबकि भाजपा के दिग्गज नेता निर्दलीय प्रत्याशियों जो जीत सकने की उम्मीद है उनसे मिल रहे हैं। ऐसे में किसे सही मानें और किसे गलत। चैनलों के अधिकतर सर्वे प्रयोजित हैं। कम से कम उत्तराखण्ड को लेकर इन सर्वे पार्टियों को अपनी रणनीति में बदलाव लाना चाहिए। मेरा मानना है कि ये बिना लहर का चुनाव था और इसमें पलडा किसी ओर भी जा सकता है।

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बहुत दोनों को ना मिला को भाजपा का पलडा रहेगा भारी
वहीं दूसरी ओर अगर कांग्रेस और भाजपा दोनों को बहुमत नहीं​ मिलता है और भाजपा कांग्रेस कुछ कम सीटें भी लेती है तो भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हो सकने की उम्मीद सभी लगा रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार राव शफात अली बताते हैं कि भाजपा को सरकार बनाने का अनुभव ज्यादा है। कांग्रेस में गुटबाजी है और ये अगर चुनाव नतीजे आने के दस बारह घंटे चली तो भाजपा गेम खेल जाएगी और सरकार बनाने के लिए निर्दलीय व अन्य का सहारा ले लेगी। वहीं पत्रकार महावीर नेगी भी यही मानते हैं उनका कहना है कि कांग्रेस को यकीन नहीं है कि निर्दलीय या अन्य कोई उनके साथ आएगा या नहीं या फिर भाजपा उनके ये मौका लेने देगी या नही। उनहोंने कहा कि भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय उत्तराखण्ड आ चुके हैं और वो अपने सरकार बनाने के माहिर खिलाडी है।

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