Kumbh mela corona testing scam in uttarakhand

कुंभ मेला कोरोना टेस्टिंग घोटाला: कौन जिम्मेदार मेला प्रशासन या फिर जिले के अफसर या फिर दोनों, पढिए

रतनमणी डोभाल।
कुंभ मेले के दौरान कोरोना टेस्टिंग में हुई धांधली के मामले में जिलाधिकारी सी रविशंकर ने टेस्ट करने वाली संस्था मैक्स कोरपोरेट सोसायटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए गए हैं। कुंभ में इस संस्था ने ढाई लाख में से करीब सवा लाख टेेस्ट नालवा लैब हिसार और डा. लालचंदानी लैब दिल्ली के जरिए की थी जिनमें काफी गड​बडियां मिली है। आरोप है कि बिना टेस्ट किए ही आधार और फोन नंबर लेकर लोगों की रिपोर्ट निगेटिव चढाई गई। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि आखिर इस घोटाले का जिम्मेदार कौन क्या मेला प्रशासन के अफसरों की अनदेखी के कारण ये हुआ है या फिर जिला प्रशासन के अफसरों ke चुप्पी साधे रहने के कारण लोगों की जान से खिलवाड किया गया है। या फिर दोनों इसके लिए जिम्मेदार है या फिर दोनों के दोनों ही पूरे मामले में बच जाएंगे, क्या कहते हैं मेला प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारी।

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मैक्स कोरपोरेट सोसायटी को काम देने पर उठे सवाल
मेला प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों ने ही कुंभ के दौरान यात्रियों और स्थानीय लोगों की कोरोना टेस्टिंग करने के लिए सूचना निकाली थी। इसके लिए सरकारी तय रेट पर टेस्ट करना था, जबकि शर्त ये थी कि लैब का आईसीएमआर के जरिए रजिस्टर्ड होना जरुरी है। लेकिन मेला प्रशासन ने मैक्स कोरपोरेट सोसायटी को रजिस्टर्ड कर दिया जिसने नालवा और डा. लाल चंदानी लैब से टेस्ट कराने की बात कही थी। जबकि मैक्स कोरपारेट सोसायटी का जमीन पर कोई वजूद ही नहीं है। वहीं मेला प्रशासन इसे सही ठहरा रहा है जबकि जिला प्रशासन शुरु से ही गलत साबित करने पर तुला है।

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क्या कहता है मेला प्रशासन

मेला स्वास्थ्य अधिकारी डा. अर्जुन सिंह सेंगर ने बताया कि मैक्स सोसायटी को थर्ड पार्टी के तौर पर काम नहीं दिया गया बल्कि मैक्स ने नालवा और डा.लाल चंदानी लैब के साथ एमओयू किया था और दोनों लैब ने मैक्स को ये अधिकार दिया था। इसके दस्तावेज हमारे पास हैं। मैक्स सोसायटी भले ही आईसीएमआर में लिस्ट ना हो लेकिन ये दोनों लैब लिस्ट हैं। उन्होंने बताया कि अगर हमने मैक्स पर रखा तो सीएमओ आफिस ने मैक्स को आईडी व अन्य जरुरतों को पूरा किया और आनलाइन पोर्टल जिस पर कोरोना टेस्टिंग का डाटा रहता है उसको देखने का अधिकारी जिला स्वास्थ्य विभाग के पास था, उन्होंने कभी हमें ये अधिकार नहीं दिया और कुछ भी गडबडी होने की जांचने की जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य विभाग की है, क्योंकि हमारे पास पोर्टल का एक्सिस नहीं था। जब हमारे पास बिल आए तब हमने जांच शुरु की, लेकिन ये काम जिला को पहले करना था। ये भी महत्वपूर्ण है कि जिला प्रशासन ही कोरोना के लिए नोडल बनाए गए थे। मेला प्रशासन का इसमें कोई रोल नहीं है।

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क्या कहता है जिला प्रशासन
वहीं जिलाधिकारी सी रविशंकर व सीएमओ डा. एसके झा का कहना अलग है। सीएमओ डा. एसके झा ने बताया कि मैक्स एजेंसी हमारे पास भी कोरोना टेस्ट की अनुमति लेने आई थी। लेकिन हमने उसे साफ मना कर दिया था। क्योंकि मैक्स संस्था आईसीएमआर में लिस्ट नहीं थी। हमनें नालवा और डा. लालचंदानी को सीधे आवेदन करने के लिए बोला था। हालांकि मेला ने मैक्स के जरिए काम क्यों दिया, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं क्योंकि जांच अभी चल रही है। उधर, जिलाधिकारी ने पूरे मामले में तुरंत मैक्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि जिलाधिकारी कोरोना के कम केस आने पर हमेशा से ही अपनी पीठ थपथपाते रहे और सीएम तीरथ सिंह रावत के सामने ही उन्होंने इसे प्रमुखता से रखा कि हमने सबसे ज्यादा टेस्ट किए और हरिद्वार का पॉजिटिविटी रेट सबसे कम है। लेकिन, उन्होंने ये कभी जानने की जरुरत नहीं समझी कि जब मरीजों से अस्पताल अटे पडे हैं तो कोरोना जांच में लोगों की रिपोर्ट इतने बडे पैमाने पर निगेटिव कैसे आ रही है। सवाल महत्वपूर्ण है कि और जवाब मेला प्रशासन व जिला प्रशासन दोनों को ही देना चाहिए।

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