*सावधान: साबिर पाक की दरगाह के बाहर चल रहा भीख मांगने का कारोबार*

अतीक साबरी।
साबिर पाक की दरगाह के बाहर खानाबदोशों ने डेरा डाला हुआ है। इन लोगों की आड़ में कई आपराधिक तत्व भी सक्रिय हैं। देश भर में विख्यात दरगाह के बाहर के ऐसे हालात को देखकर जायरीन अपने मन में साबिर पाक की नगरी की कैसी तस्वीर साथ ले जाते होंगे, यह किसी से छिपा नहीं है।
पिरान कलियर: साबिर पाक की दरगाह के बाहर खानाबदोशों ने डेरा डाला हुआ है। कोई जियारत के लिए आता दिखा नहीं कि इनकी फौज लग जाती है पीछे, तब तक जायरीन का पीछा नहीं छोड़ा जाता जब तक कि उनके हाथ में कुछ रुपए-पैसे नहीं आ जाते। कुछ लोगों का मानना है कि यह उनके हालात की मजबूरी है जबकि कुछ लोग इसे मांगने का व्यापार बताते हैं। इन लोगों की आड़ में कई आपराधिक तत्व भी सक्रिय हैं। देश भर में विख्यात दरगाह के बाहर के ऐसे हालात को देखकर जायरीन अपने मन में साबिर पाक की नगरी की कैसी तस्वीर साथ ले जाते होंगे, यह किसी से छिपा नहीं है।

धार्मिक नगरी पिरान कलियर में यूं तो कई जगह खानाबदोशों का जमावड़ा मिल जाएगा लेकिन दरगाह के बाहर की सड़क पर लगा इनका जमावाड़ा अलग ही नजर आता है। ‘बाबा के नाम पर कुछ दे दे.. यह आवाज सुनते ही समझ लो दरगाह नजदीक ही है। कोई सड़क पर लेटा है तो कोई हाथ पसार कर बैठा है। कोई कार आती है तो झुंड में उसके पीछे दौड़ते नजर आते हैं। कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि कार चालक इन्हें बचाने के चक्कर में आगे नहीं बढ़ पाता। अजीबोगरीब हालात तक बनते हैं जब एक को पैसे मिल जाएं तो बाकी सारे के सारे गाड़ी पर लटक जाते हैं।

लड़ाई-झगड़े उतारू

इनमें कई लोग ऐसे हैं जो नशा करते हैं और एक-दूसरे से लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। साथ ही इनमें ही कुछ लोग ऐसे हैं जो जेबतराशी का काम भी करते हैं। पुलिस व प्रशासन को भी सारी जानकारी है लेकिन जायरीन की तकलीफ को समझते हुए इनको हटाने के लिए कोई कारगर कदम आज तक नहीं उठाए जा सके हैं।

केवल साबिर पाक के उर्स में ही भिखारियों पर होती है कार्रवाई

साबिर पाक के उर्स के दौरान केवल दरगाह बाजार से इन भिखारियों को पकड़ने के बाद भिखसूग्रह भेजा जाता है, इसके अलावा साल में एक बार भिक्षावृति मुक्ति का नारा व कार्रवाई नही होती है।

यह हो समाधान
-कुछ लोग वाकई अगर मांगने का व्यापार कर रहे हैं तो उन्हें चिंहित तक उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। कम उम्र के बच्चों और अन्य जरूरतमंद के लिए पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।
-जरूरतमंद को नरेगा जैसे कार्य में भेजकर भी इन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
-विकलांग (मजबूर) लोगों के लिए सड़क के एक तरफ जगह चिंहित की जा सकती है।

-होटल-रेस्टोरेंट पर मिलने वाले खाने के टोकन बांटने के लिए भी जगह तय होनी चाहिए।

इनका कहना है
दरगाह क्षेत्र में खानाबदोशों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्हें हटाया भी जाता है। लेकिन पेट भरने के लिए ये लोग फिर आ जाते हैं। कई दिव्यांग है जिनके पुर्नवास की जरूरत है। जायरीन व आमजन उन्हें सिर्फ खाना-पानी दें ना की पैसा। पैसे से नशा, अपराध की प्रवृति बढ़ी है। खानाबदोशों की आड़ में अपराधी तत्व व जेबतराश भी है। निगरानी, धरपकड़ के लिए 24 घंटे 8 महिला पुलिसकर्मी दरगाह परिसर मेंं तैनात रहती है, इसका असर भी सामने आया है।

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