BJP offer to former mla ambrish kumar to save kalayan singh government

जब कल्याण सिंह सरकार को बचाने के लिए अंबरीष कुमार को मिला था बडा आफर, क्या हुआ था तब

विकास कुमार।
संघर्षवादी नेता और यूपी के समय हरिद्वार सीट से विधायक रहे अंबरीष कुमार का मंगलवार देर रात निधन हो गया। अंबरीष कुमार 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। यूपी में तब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद की सियासत नए—नए गठबंधनों कोे जन्म दे रही थी, जिसके केंद्र में कल्याण सिंह, मुलायम सिंह और बसपा प्रमुख मायावती थी। 1996 में कल्याण की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी 174 सीटों के साथ सबसे आगे थी लेकिन स्पष्ट बहुमत ना होने के कारण सब अधर में ही था।
राष्ट्रपति शासन के बाद कल्याण सिंह ने बसपा के सहयोग से सरकार बनाई लेकिन बसपा ने 1997 में समर्थन वापस ले लिया और कल्याण सिंह सरकार के सामने सरकार बचाने का कठिन चुनौती थी। इसके लिए जोडतोड शुरु हो चुका था और अल्पमत की सरकार को समर्थन देने के लिए हरिद्वार से विधायक अंबरीष कुमार के पास भी बडा आफर आया था, जिसे अगर अंबरीष कुमार स्वीकार कर लेते तो आज भाजपा में बहुत बडे नेता होते और शायद बीस साल से हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक को कभी मौका भी नहीं मिला होता।

—————————————————
भाजपा के आफर पर क्या बोले थे अंबरीष कुमार
हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी ने बताया कि यूपी के भाजपा के एक बडे ​नेता ने मुझसे संपर्क किया और अंबरीष कुमार से बात कर कल्याण सिंह सरकार को समर्थन देने के लिए राजी करने की बात कही। इसके लिए उन्होंने पार्टी और सरकार में पद आदि सबकुछ देने का बडा आफर दिया था। चूंकि, अंबरीष कुमार से मेरे पारिवारिक रिश्ते थे और मेरे बडे—बुजुर्गोें को वो अच्छी तरह जानते थे, लिहाजा मैंने उन भाजपा के र्शीष नेता को दो टूक कह दिया कि मैं ये बात उनसे कर भी नहीं सकता हूं क्योंकि जहां तक मैं अंबरीष कुमार को जानता था वो किसी भी कीमत पर विचारधारा से समझौता कर नहीं सकते थे। हालांकि, किसी अन्य जरिए ये अंबरीष कुमार तक आफर का मैसेज पहुंचाया गया लेकिन अंबरीष कुमार ने साफ इनकार कर दिया। असल में अंबरीश कुमार बडे ही सिद्धांतवादी नेता थे और पूरे उत्तराखण्ड में उनसे बडा सेकुलर नेता ना था ना है और ना ही होगा। उस समय अगर अंबरीष कुमार भाजपा का आफर मान लेते तो आज भाजपा में बहुत बडे नेता होते और विधानसभा या लोकसभा में जाना उनके लिए आसान होता। लेकिन, उन्होंने कभी समझौता नहीं किया, वो जानते थे कि इससे नुकसान होगा लेकिन फिर भी अपने सिद्धांतों पर अडे रहे।

खबरों को व्हट्सएप पर पाने के लिए हमें मैसेज करें: 8267937117

Share News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!