आस्था और रूहानियत के साथ संपन्न हुआ बाबा गुलाम जिलानी का उर्स, साहिबज़ादा शाह यावर मियां और सूफी राशिद की देखरेख में उमड़ा जनसैलाब

अतीक साबरी:-

पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के खादिम-ए-खास बाबा गुलाम जिलानी का सालाना उर्स अकीदत और मोहब्बत की मिसाल पेश करते हुए रविवार को कुल की रस्म के साथ संपन्न हो गया। तीन दिनों तक चले इस रूहानी जलसे में हरियाणा और पंजाब समेत देश के कोने-कोने से आए जायरीन ने अपनी हाजिरी पेश की। पूरे उर्स के दौरान साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी की रूहानी शख्सियत और सूफी राशिद साबरी का समर्पण चर्चा का केंद्र बना रहा।​

शाह यावर मियां की सरपरस्ती: रूहानी महफिल में गूंजे सूफियाना कलाम​-उर्स के सबसे अहम पड़ाव ‘महफिल-ए-समा’ का आयोजन साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी की सरपरस्ती में किया गया। उनकी गौरवमयी उपस्थिति ने जायरीन के दिलों में जोश भर दिया। कव्वाल निजाम साबरी ने जब सूफियाना कलाम पेश किए, तो शाह यावर मियां की मौजूदगी में पूरा मजमा रूहानी रंग में सराबोर नजर आया। साहिबज़ादा की सरपरस्ती ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की।​

सूफी राशिद साबरी की मेजबानी: खिदमत और लंगर का बेमिसाल संगम​-बाबा गुलाम जिलानी के खलीफा सूफी राशिद साबरी ने अपनी खानकाह पर खिदमत-ए-खल्क की अद्भुत मिसाल पेश की। शनिवार को बाद नमाज़-ए-ईशा उनकी देखरेख में आयोजित ‘लंगर-ए-आम’ में हजारों जायरीन ने शिरकत की। सूफी राशिद की कुशल व्यवस्था और मेहमाननवाजी के कारण दूर-दराज से आए जायरीन को घर जैसा अहसास हुआ। उनकी सक्रियता ने उर्स की हर रस्म को सुचारू और भव्य बनाया।​

कुल की रस्म के साथ देश में अमन-ओ-अमान की मांगी दुआ-​रविवार सुबह 10 बजे उर्स की सबसे मुकद्दस रस्म ‘कुल शरीफ’ अदा की गई। साहिबज़ादा शाह यावर मियां और सूफी राशिद साबरी की मौजूदगी में साबरी सिलसिले के सूफियों और मुरीदों ने हाथ उठाकर मुल्क की तरक्की, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए खुदा की बारगाह में दुआएं मांगी।​

अकीदतमंदों का उमड़ा हुजूम, दिग्गज रहे मौजूद​इस मौके पर नोमी मियां, शफीक साबरी, लियाकत साबरी, अकरम साबरी, समद साबरी, अब्दुल समद, रोहित साबरी, रघु साबरी, लक्की साबरी, शिव साबरी, शम्स अली, गुलाम ख्वाजा, मुनव्वर और मीरहसन सहित सैकड़ों गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बाबा गुलाम जिलानी को खिराज-ए-अकीदत पेश की।