अतीक साबरी:-
कलियर थाना क्षेत्र के अंतर्गत इमलीखेड़ा की सड़कों पर इन दिनों विकास की चादर ओढ़कर विनाश का काला कारोबार फल-फूल रहा है। मिट्टी खनन की परमिशन की आड़ में ठेकेदार आम आदमी की जिंदगी से खूनी खेल खेल रहे हैं। मंगलवार को इमलीखेड़ा रोड उस वक्त चीखों से दहल गया जब लकड़ियों से लदा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक सड़क पर बिछी चिकनी मिट्टी के कारण अनियंत्रित होकर पलट गया। वह तो ऊपर वाले का शुक्र था कि मौत को करीब देख ट्रैक्टर चालक ने बिजली की फुर्ती से छलांग लगा दी, वरना आज खबर किसी की जान बचाने की नहीं, बल्कि मातम की होती।

सड़कें बनीं ‘कांच’, डंपर बने काल: हकीकत यह है कि खनन स्थलों से निकल रहे ओवरलोड डंपरों के विशालकाय टायरों में चिपकी गीली चिकनी मिट्टी पूरी सड़क पर काल बनकर बिछ जाती है। कायदे से बारिश के इस मौसम में मिट्टी का उठान और परिवहन सख्त मना होना चाहिए क्योंकि गीली मिट्टी सड़क पर ‘स्लिपिंग जोन’ पैदा करती है, लेकिन यहाँ नियम और कानून ठेकेदारों की रसूख वाली जेबों में कैद हैं। इन रसूखदारों को सिर्फ अपनी तिजोरियां भरने से मतलब है, भले ही इसके लिए आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़े। आज के इस हादसे ने साफ कर दिया है कि इमलीखेड़ा की सड़कें अब राहगीरों के लिए सुरक्षित नहीं रह गई हैं।

जिम्मेदार विभागों की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ और जनता का आक्रोश: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस विभाग पर इन खनन माफियाओं को नकेल कसने की जिम्मेदारी है, वह सब कुछ देखते हुए भी ‘अंधा-गूंगा और बहरा’ बना हुआ है। क्या माइनिंग विभाग और स्थानीय प्रशासन किसी बड़े नरसंहार का इंतजार कर रहे हैं? आए दिन होने वाले इन हादसों के बावजूद ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सड़कों की सफाई तक कराना जरूरी नहीं समझते।

ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी के इन सौदागरों ने पूरे क्षेत्र को डस्ट और कीचड़ के नरक में झोंक दिया है। अगर जल्द ही इन ‘मौत के सौदागरों’ पर कानूनी हंटर नहीं चला, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


