अतीक साबरी:-
पिरान कलियर (रुड़की): विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक पिरान कलियर, जहाँ देश-विदेश से लाखों अकीदतमंद अपनी मुरादें लेकर आते हैं, आज बदहाली और भ्रष्टाचार के दोराहे पर खड़ी है। नव नियुक्त वक्फ बोर्ड सीईओ ने पद संभालते ही प्रेस नोट के जरिए उम्मीदों का पिटारा तो खोल दिया, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है।बड़ा सवाल यह है कि क्या सीईओ साहब वाकई व्यवस्था सुधारने आए हैं या फिर यह सिर्फ एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ है?
1. सरकारी खजाने को चपत: लाखों की नीलामी, जीरो वसूलीदरगाह प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत दरगाह क्षेत्र और मेन गेट पर नीलाम की गई कच्ची दुकानें हैं। प्रशासन ने नीलामी तो कर दी, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी एक रुपया किराया नहीं वसूला गया। इन दुकानों पर लाखों रुपये का बकाया है।
सवाल: आखिर किसके संरक्षण में इन दुकानदारों को ‘मुफ्त’ की मलाई खिलाई जा रही है? क्या नए CEO इस वसूली को अंजाम तक पहुंचा पाएंगे या पिछली फाइलों की तरह इसे भी दबा दिया जाएगा?
2. आस्था के नाम पर ‘लूट’: फर्जी सूफी और खादिमों का आतंकदरगाह परिसर के अंदर सबसे ज्यादा परेशानी ज़ायरीनों को उन ‘फर्जी सूफियों’ और ‘स्वयंभू खादिमों’ से है, जो दूर-दराज से आए भोले-भाले लोगों से अवैध वसूली करते हैं। दरगाह की गरिमा को तार-तार करते इन तत्वों पर आज तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। क्या नए साहब इन फर्जी चेहरों को दरगाह से बाहर करने का साहस दिखाएंगे?
3. कूड़े के ढेर और अतिक्रमण: नारकीय हुई ज़ायरीनों की राह सफाई व्यवस्था की बात करें तो पिरान कलियर की गलियां गंदगी से बजबजा रही हैं। हज हाउस रोड से लेकर दरगाह के मुख्य गेट तक अवैध अतिक्रमण का बोलबाला है। दरगाह के पार्कों में अवैध दुकानें सज गई हैं।
सीईओ के प्रेस नोट पर तंज: साहब ने अपनी उपलब्धि गिनाने के लिए जिन कामों का जिक्र किया है, उनका सीधा वास्ता जिला प्रशासन से है। दरगाह की आंतरिक व्यवस्था, जो उनके अधिकार क्षेत्र में है, वह पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
4. खाली पड़े ठेके: वक्फ बोर्ड को करोड़ों का नुकसान दरगाह की आय का जरिया बनने वाले अधिकतर ठेके खाली पड़े हैं या प्रक्रिया में उलझे हैं। जब आय के स्रोत ही बंद होंगे, तो विकास कार्य कैसे होंगे? दरगाह में आने वाले ज़ायरीनों के लिए पीने के पानी, ठहरने और बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी जस का तस बना हुआ है।
बड़ा सवाल: सुधार या सिर्फ पब्लिसिटी:-पिरान कलियर की जनता और अकीदतमंद पूछ रहे हैं कि कल जो ‘प्रेस नोट’ जारी हुआ, क्या वह केवल अखबारों में नाम चमकाने के लिए था? दरगाह की जो व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है, उसे लाइन पर लाने के लिए कोई ठोस योजना है या नहीं?
“दरगाह प्रशासन को अब दावों से बाहर निकलकर काम करना होगा। कच्ची दुकानों से वसूली, अवैध कब्जों पर बुलडोजर और फर्जी खादिमों पर पुलिसिया कार्रवाई ही नए CEO की काबिलियत साबित करेगी। वरना, पब्लिसिटी के गुब्बारे को फूटने में देर नहीं लगती।”

