रुड़की के डॉ. शिरोमणि हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत: डॉ. पूनम गुप्ता समेत 3 डॉक्टरों पर नामजद मुकदमा, बाउंसरों पर भी संगीन आरोप
अतीक साबरी:-● राजस्व उप-निरीक्षक की पत्नी की मौत के मामले में लापरवाही और गुंडागर्दी की FIR; चिकित्सा जगत में मचा हड़कंप
● पीड़ित पति का आरोप- “डॉक्टरों ने छिपाई असलियत, विरोध करने पर बाउंसरों ने पिस्तौल तानकर दी जान से मारने की धमकी”
रुड़की।स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मौत परोसने और विरोध करने पर बंदूक की नोक पर डराने का एक सनसनीखेज मामला रुड़की के डॉ. शिरोमणि हॉस्पिटल से सामने आया है। हरिद्वार तहसील में कार्यरत राजस्व उप-निरीक्षक पंकज कुमार की पत्नी मोनिका भावे (राजस्व उप-निरीक्षक, मो0 कुन्हारी) की प्रसव के बाद हुई मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सक डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. आशीष गुप्ता और डॉ. संजय कसल के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लापरवाही की पूरी कहानी: दर्द से तड़पती रही मोनिका पीड़ित पंकज कुमार द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को उन्होंने अपनी पत्नी मोनिका को डिलीवरी के लिए डॉ. शिरोमणि हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। शाम 4:20 बजे मोनिका ने एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। पति का आरोप है कि मोनिका दर्द से कराहती रही, लेकिन मुख्य चिकित्सक डॉ. पूनम गुप्ता उसे देखने नहीं आईं। लंबे इंतजार के बाद जब नर्सों ने स्थिति गंभीर बताई, तब डॉक्टर हरकत में आईं।
इन तीन डॉक्टरों पर गिरी गाज (नामजद आरोपी):तहरीर में स्पष्ट रूप से इन तीन डॉक्टरों पर लापरवाही और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है:डॉ. पूनम गुप्ता: (मुख्य चिकित्सक, डॉ. शिरोमणि हॉस्पिटल) – इलाज में देरी और बाउंसर बुलाकर धमकाने का आरोप।
डॉ. आशीष गुप्ता: इमरजेंसी के दौरान बुलाए गए सहयोगी डॉक्टर।डॉ. संजय कसल:
टीम में शामिल तीसरे डॉक्टर, जिन पर सही उपचार न देने का आरोप है।
अस्पताल बना ‘अखाड़ा’: पिस्तौल के दम पर परिजनों को खदेड़ामामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पीड़ित पति ने डॉक्टरों से अपनी पत्नी की स्थिति जाननी चाही। आरोप है कि डॉ. पूनम गुप्ता ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए अस्पताल में बाउंसर बुला लिए। इन बाउंसरों ने पंकज कुमार पर पिस्तौल तान दी और बाहुबल का प्रयोग करते हुए उन्हें डराया-धमकाया। पंकज का कहना है कि उन्हें जबरन एम्बुलेंस में बिठाकर भूमानंद अस्पताल रेफर कर दिया गया, जबकि उनकी पत्नी की मौत संभवतः पहले ही हो चुकी थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई भूमानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने एम्बुलेंस में ही मोनिका को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद ज्वालापुर पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया। तहरीर में साफ कहा गया है कि डॉक्टरों द्वारा सही स्थिति न बताने और समय पर रेफर न करने के कारण एक महिला अधिकारी की जान गई है।
”डॉक्टरों ने मेरी पत्नी को तड़पते हुए छोड़ दिया। जब मैंने सवाल किए तो उन्होंने इलाज के बजाय हथियारबंद बाउंसरों से मुझे डराया। यह चिकित्सा नहीं, बल्कि अपराधी कृत्य है।”— पंकज कुमार (प्रार्थी एवं राजस्व उप-निरीक्षक)
ताजा स्थिति:गंगनहर कोतवाली पुलिस ने डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. आशीष गुप्ता और डॉ. संजय कसल के खिलाफ उचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

