अतीक साबरी:-
पिरान कलियर। पिरान कलियर नगर पंचायत के बेड़पुर गांव से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे केवल गंदगी की नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पास लगा गंदगी का पहाड़ यह बताने के लिए काफी है कि अधिशासी अधिकारी (ईओ) कुलदीप चौहान के लिए प्रधानमंत्री का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ महज एक कागजी औपचारिकता है।
शिक्षा के मंदिर की दहलीज पर सड़ांध: जिम्मेदार कौन?बेड़पुर के मासूम बच्चे जिस रास्ते से ककहरा सीखने स्कूल जाते हैं, वहां नगर पंचायत ने बीमारियों का जाल बिछा रखा है। स्कूल के ठीक पास लगा गंदगी का अंबार ईओ की कार्यप्रणाली पर कालिख पोत रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या साहब को इन मासूमों की जान की कोई कीमत नजर नहीं आती? जब नौनिहाल इस सड़ांध और मच्छरों के बीच से गुजरते हैं, तो क्या नगर पंचायत के हुक्मरानों का जमीर नहीं जागता?
साहब का ‘ऑफिस-टू-होम’ प्रोटोकॉल, जनता बेहाल!क्षेत्र में मक्खी-मच्छरों का तांडव है, संक्रामक रोगों का खतरा सिर पर मंडरा रहा है, लेकिन पिरान कलियर नगर पंचायत ‘फॉगिंग’ और ‘छिड़काव’ जैसे शब्दों से शायद अनजान है। आरोप है कि ईओ कुलदीप चौहान का पूरा ध्यान केवल वातानुकूलित कमरे में बैठकर समय काटने पर है। जनता की समस्याओं से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। साहब सुबह दफ्तर तशरीफ़ लाते हैं और शाम होते ही अपनी जिम्मेदारी को ठंडे बस्ते में डालकर घर निकल जाते हैं। नगर पंचायत क्षेत्र में पसरी यह अव्यवस्था चीख-चीख कर ईओ की विफलता की कहानी बयां कर रही है।हैरानी की बात यह है कि जब भी जनसमस्याओं को उठाया जाता है, तो अपनी नाकामियों को सुधारने के बजाय तंत्र दबाने की राजनीति पर उतर आता है। लेकिन जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। स्कूल के पास फैली यह गंदगी और मच्छरों का आतंक किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहा है। यदि इन नौनिहालों को कुछ भी होता है, तो इसका सीधा जिम्मेदार नगर पंचायत प्रशासन और उसके सर्वेसर्वा अधिकारी होंगे।
उच्चाधिकारियों से गुहार: कब टूटेगी साहब की नींद?क्षेत्र की जनता अब जिलाधिकारी और शासन से मांग कर रही है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसी जाए जो स्वच्छ भारत अभियान की छवि को धूमिल कर रहे हैं। क्या पिरान कलियर को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिलेगी या ईओ साहब की ‘कुंभकर्णी नींद’ ऐसे ही जारी रहेगी?