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संशोधन: वीआईपी नंबर लेने के लिए खर्च करने होंगे इतने पैसे, पढिए कैबिनेट के मुख्य फैसले

संशोधन: वीआईपी नंबर लेने के लिए खर्च करने होंगे इतने पैसे, पढिए कैबिनेट के मुख्य फैसले
ब्यूरो।
उत्तराखण्ड सरकार मंगलवार को कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई।इनमें से एक मोटर नियमावली में संशोधन किया जाना भी रहा। संशोधन के बाद वाहनों का वीआईपी नंबर लेने के लिए न्यूनतम बोली एक लाख रुपए कर दी गई है। वहीं दूसरे वीआईपी नंबर लेने के लिए भी बोली राशि तय कर दी गई है। मोटर नियमावली की धारा 52, 135, 179, आदि में संशोधन किया गया है। वीआईपी नंबर 001 और 786 की मिनिमम बोली को बढ़ाकर एक लाख कर दी गई है। 11, 22, 33, 44, 55, 66, 77, 88, 99 के नंबर लेने के लिए 25 हजार की बोली होगी। परिवहन कर अधिकारी द्वितीय की वर्दी में भी आंशिक परिवर्तन किया है। बटन के बदले स्टार और काले जूते की जगह भूरे जूते मान्य किये गए हैं।
इसके अलावा कई दूसरे अहम फैसले भी लिए गए। न्याय विभाग की उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिक वर्गीय अधिष्ठान में आंशिक संशोधन किया गया है। उत्तरप्रदेश की जगह उत्तराखंड और इलाहाबाद की जगह नैनीताल किया गया है। न्यायिक सेवा नियमावली में आंशिक संशोधन किया गया है। उत्तराखंड वन क्षेत्राधिकारी सेवा नियमावली 2019 की धारा 8प में संशोधन किया गया है। गंगोत्री राष्ट्रीय उड्डयन को ईको सेंसटिव जोन में संशोधन किया गया है। ईको सेंसटिव जोन से कई गांवों को बाहर निकाला गया। नंधौर वन्य जोन के ईको सेंसेटिव जोन में संशोधित किया गया है। नंधौर ईको सेंसेटिव जोन से डांडा, कठोल सहित तीन गांवों को बाहर किया है। यानी 99.5 आरक्षित वन और 0.5 राजस्व क्षेत्र में है। उत्तराखंड स्टेट सीड एंड ऑर्गेनिक प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी के ढांचे को मंजूरी दी गई है। इसके लिए 171 पद स्वीकृत किए गए हैं। उच्च शिक्षा में आंशिक संशोधन, सर्टिफिकेट कोर्स इन लिपिक में सी लीव, बी लीव और एम लीव को मान्य किया गया है। एनडीए और आईएमए के अलावा एयरफोर्स और नेवी के लिए प्रोत्साहन राशि 50 हजार रुपए देने को भी मंजूरी मिल गई है।
उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली में संशोधन किया गया है। पहले लिखित एग्जाम होगा। फिर शारीरिक दक्षता की जांच होगी। उत्तराखंड लेखा परीक्षा, राजपत्रिका सेवा नियमावली लाई जाएगी। विश्व बैंक से पोषित योजन के तहत किए जाने वाले कार्यों के लिए पहले अर्बन अर्धनगरीय क्षेत्र के लिए पेयजल नियमावली को मंजूरी मिली है। इससे 35 गांवों को लाभ मिलेगा। राज्य पर्यावरण संरक्षण जलवायु परिवर्तन निदेशालय अब पर्यावरण मंत्रालय के नाम से कार्य करेगा। पर्यावरण मंत्रालय के चार विभाग कार्यरत होंगे। निदेशालय, पॉल्युशन नियंत्रण बोर्ड, बायो डाईवर्सिटी बोर्ड और स्टेट एनवायरनमेंट इंपैक्ट कमेटी।

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