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पांच हजार लावारिसों की अस्थियां गंगा में की जाएगी विसर्जित, इस संस्था ने उठाया जिम्मा

राकेश वालिया।
दिल्ली सहित देश के तमाम राज्यों से एकत्र कर लायी गयी लावारिस व्यक्तियों की अस्थियों का संत महापुरूषों के सानिध्य में  सितम्बर को गंगा में विसर्जन किया जाएगा। सनातन हिंदू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालिका पीठाधीश्वर महंत सुरेद्रनाथ अवधूत महाराज ने प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि लावारिस व्यक्तियों की अस्थियों को विधि विधान से गंगा में विसर्जित करने के अभियान में जुटी देवात्थान समिति के तत्वाधान में दिल्ली से शुरू होने वाली अस्थि कलश विसर्जन यात्रा 2सितम्बर को हरिद्वार पहुंचेगी। विगत  वर्षो से निरंतर चल रहे लावारिस व्यक्तियों की अस्थि विसर्जन के इस पुण्यदायी अभियान के तहत अब तक करीब एक लाख इक्कीस हजार पांच सौ तेरह अस्थि कलशों को वैदिक रीति से गंगा में विसर्जित किया जा चुका है। इसमें वर्ष 2 में पाकिस्तान से लाए गए 2अस्थि कलश भी शामिल हैं।

सितम्बर को सती घाट पर अस्थि विसर्जन के दौरान हरिद्वार के संत महापुरूष व अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी भी अस्थि कलशों पर पुष्पांजलि करेंगे। उन्होंने कहा कि पतित पावनी मां गंगा ही मोक्ष प्रदाता है। जिसके आचमन मात्र से ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। म.म.स्वामी कपिल मुनि महाराज ने बताया कि सनातन हिन्दू धर्म में मृत्यु के पश्चात अस्थियों को गंगा में विसर्जित किए जाने का विशेष महत्व है। अस्थियों को गंगा की गोद में स्थान मिलने पर ही मृत व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा कि अस्थि विसर्जन के महत्व को इससे भी समझा जा सकता है कि अपने पुरखों को मोक्ष दिलाने के लिए राजा भागीरथ हजारों वर्ष कठोर तप करने के बाद गंगा को पृथ्वी पर लाए। गंगा के स्पर्श किए जाने के बाद ही अधोगति में पड़े राजा भागीरथ के पुरखों को मोक्ष प्राप्त हुआ था। श्री देवोत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने बताया कि सितम्बर को उत्तरी हरिद्वार स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट से पदयात्रा के रूप में चलकर अस्थि कलश यात्रा कनखल स्थित सती घाट पहुंचेगी। उत्तराखण्ड के शहरी विकास विकास मंत्री मदन कौशिक मदन कौशिक भी निष्काम सेवा ट्रस्ट पहुंचकर अस्थि कलशों पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली के अलावा देश के दूसरे राज्यों से अस्थि कलशों का आना जारी है। यात्रा संयोजक व समिति के महामंत्री विजय शर्मा ने बताया कि सती घाट पर पंडित जितेंद्र शास्त्री के सानिध्य में  किलो दूध की धारा के साथ समस्त अस्थि कलशों को पूर्ण वैदिक विधि विधान तथा मंत्रोच्चार के बीच गंगा में विसर्जित किया जाएगा।

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