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मोदी सरकार की नीतियों से संतुष्ट हैं ये कांग्रेसी नेता, पढ़े नाम

ब्यूरो। केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ सो​निया गांधी और राहुल गांधी हर मोर्चे पर आवाज बुलंद कर रहे हैं। लेकिन, उनकी ही पार्टी के सिपाही मोदी सरकार की नीतियों से संतुष्ट हैं। ये वो सिपाही हैं जो 2017 चुनाव में कांग्रेस का टिकट मांग रहे हैं। असल में दो सितंबर को मोदी सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल की जानी है। इसके लिए कांग्रेस, वाम दलों के साथ—साथ देश की कई बड़ी श्रमिक यूनियनें एक साथ हड़ताल कर रही हैं। लेकिन, हरिद्वार की बीएचईएल में कांग्रेस से जुड़े दो नेताओं की श्रमिक यूनियनों ने हड़ताल से खुद को अलग कर लिया है। ये दोनों यूनियनें कांग्रेस की मजूदर विंग इंटक से अलग होकर चुनाव लड़ती आई हैं और इंटक को बड़ा नुकसान भी इन्होंने ही पहुंचाया है।
ये दोनों यूनियनें हैं भेल मजदूर कल्याण परिषद जिसके अध्यक्ष कांग्रेस नेता राजबीर सिंह चौहान हैं और हैवी इलेक्ट्रिकल्स वर्कर्स ट्रेड यूनियन जिसके प्रमुख पूर्व विधायक रामयश सिंह है। यूनियन की जिम्मेदारी संभाल रहे उनके बेटे विकास सिंह कांग्रेस की जिला कमेटी में उपाध्यक्ष भी हैं।
राजबीर सिंह चौहान और रामयश सिंह दोनों ही नेता रानीपुर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी ठोंक रहे हैं। लेकिन, ये मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ होने जा रही हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। जबकि भेल की दूसरी यूनियनें संयुक्त मोर्चा बनाकर हड़ताल करेगी। जनपद के बैंको और सिडकुल में भी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसमें इंटक, सीटू, एटक, बीएमटीयू और एचएमएस भाग लेंगी। इससे साफ है कि कांग्रेस से ज्यादा ये दोनों नेता अपने निजी हितों को तरजीह दे रहे हैं। इनका अलग होना इनकी मोदी सरकार की नीतियों का समर्थन करना ही माना जाएगा।

क्या कहते हैं नेता
हमारी यूनियन ने हड़ताल से अलग होने का निर्णय लिया है। हमारे यूनियन के सदस्य हड़ताल में शामिल नहीं होना चाहते हैं।
विकास सिंह, उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी।
दोनों यूनियनें भेल प्रबंधन के इशारों पर नाचती है। इनका श्रम हितों से कोई सरोकार नहीं है। ये ​सिर्फ अपने हितों को साधती हैं। ये तो अपनी पार्टी कांग्रेस के भी नहीं हुए हैं तो श्रमिकों के कैसे हो जाएंगे। इनके अलग होने से हड़ताल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
केडी गुंसाई, श्रमिक नेता, सीटू।

इन दोनों नेताओं ने किस आधार पर हड़ताल से अलग होने का फैसला किया है। मुझे नहीं पता है, मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं।
राम विशाल देव, युवक कांग्रेस नेता।
मुझ पर कांग्रेस विरोधी होने का आरोप लगाने वाले कांग्रेसी नेताओं में हड़ताल का विरोध कर रहे इन दोनों नेताओं से सवाल करने की हिम्मत नहीं है। ये सवाल कभी नहीं करेंगे, क्योंकि हमाम में सब नंगे हैं। इनका कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है।
अंबरीष सिंह, पूर्व विधायक, हरिद्वार।

 

क्या हो रही है हड़ताल
मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार किए जाने और पब्लिक सेकटर की कंपनियों का निजीकरण ना किए जाने के विरोध में श्रमिक संगठन हड़ताल कर रहे हैं। साथ ही रक्षा और दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निवेश ना किए जाने की मांग भी श्रमिक संगठनों ने रखी है।

One Reply to “मोदी सरकार की नीतियों से संतुष्ट हैं ये कांग्रेसी नेता, पढ़े नाम

  1. न्यूनतम मजदूरी की मांग जायज है पब्लिक सेक्टर का निजीकरण और रक्षा छेत्र में विदेशी निवेश नही होना चाहिए लेकिन ठेकेदारी प्रथा का विरोध और अंकुश की बात नहीं की गई वित्त मंत्री जी ने कल कहा कि न्यूनतम मजदूरी रूपये. 247 से बढाकर 350 रू. कर दी गई अर्थात 10500 रू. महीना. –अब इस पैसे में 200रू. किलो की दाल कैसे खायेगा मजदूर -हह बीजेपी कभी मजदूर हितैषी नही रही -हयह केवल पूंजीपति की सरकार है -हमोदीजी गरीबी पर चिन्तन नही करते

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