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‘भाजपा में जाकर सुबोध ने भाई के सिद्धांतों की हत्या की है’

भगवानपुर से कांग्रेस विधायक मामता राकेश के सामने अपने पति की विरासत संभालने के साथ ही परिवार से ही मिल रही चुनौती को भी पार पाना है। वर्तमान हालात उनके लिए आसान नहीं है जब उनके देवर सुबोध राकेश ने बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया है। वो इस बारे में क्या सोचती है, आइये जानते हैं उनसे….
प्रश्न— पति सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद आपके देवर सुबोध राकेश आपसे अलग हो गए हैं। परिवार में ये नौबत क्यों आई।

उत्तर— सुबोध राकेश मेरा शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। उपचुनाव में उन्होंने मुझे टिकट ना दिए जाने के लिए लॉबिंग की थी। लेकिन, सीएम हरीश रावत ने जिम्मेदारी से काम लेते हुए सही फैसला किया और स्व. सुरेंद्र राकेश के सही प्रतिनिधि को चुना। यही कारण है कि मुझे चुनाव में रिकार्ड मतों से विजयी मिली। अगर जनता में विरोध होता तो जनता मुझे नकार देती। सुबोध राकेश खुद को सुरेंद्र राकेश का उत्ताराधिकारी मान रहे हैं। ये बिल्कुल गलत हैं। मेरे पति के समर्थक और भगवानपुर की जनता मेरे साथ है।

प्रश्न— सुबोध राकेश के फैसले को किस तरह से देखती है।
उत्तर— ये उनका आत्मघाती कदम है। वो अपने भाई का उत्तराधिकारी खुद को बता रहे हैं। जबकि उनके भाई ने कभी फिरकापरस्त राजनीति का समर्थन नहीं किया। सुरेंद्र राकेश एक सिद्धांतवादी नेता थे। वो हमेशा सेकुलर राजनीति के पक्षधर रहे, जिसमें सर्वसमाज के लोग उनके साथ थे। आज सुबोध ने अपने बड़े भाई के सिद्धांतों की हत्या कर दी है। छोटे भाई के इस फैसले से आज स्व. सुरेंद्र राकेश की आत्मा को ठेस पहुंची होगी। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका सगा भाई उनके सिद्धांतों को इस तरह से चोट पहुंचाएगा। वो परिवार की राजनीति को बचाने नहीं गए बल्कि उन्होंने परिवार के सिद्धांतों की बलि दे दी है। मुझे याद है कि सुरेंद्र राकेश को भाजपा ने कई बार आॅफर दिए पार्टी में आने के लिए। लेकिन, उन्होंने हर बार एक ही जवाब दिया कि मैं भाजपा में जाकर अपने सेकुलर सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा, चाहे मुझे राजनीति क्यों ना छोडनी पड जाए। लेकिन मैं भाजपा में नहीं जाउंगा।

प्रश्न— क्या अभी भी कोई सुलह की गुंजाइश है।

उत्तर— सुबोध राकेश अभी मुगालते में हैं। उनके इर्द—गिर्द घूम रहे लोगों ने उनका दिमाग खराब किया है। उन्हें खुद भी नहीं पता ​कि उन्होंने क्या कदम उठा दिया है। इसका जवाब उन्हें भगवानपुर की जनता देगी। फिलहाल तो वो किसी भी बात को सुनने को राजी नहीं है। लेकिन, राजनीति में जल्द ही समझ आ जाती है, ऐसा मुझे विश्वास है।
प्रश्न— क्या आपको लगता है कि हरीश रावत सरकार ने आपको मंत्रिमंडल में जगह ना देकर दलित समाज की उपेक्षा की है।
उत्तर— मुझे ऐसा नहीं लगता। सीएम हरीश रावत के सामने कई सारी चुनौतियां थी। सरकार और पार्टी में तालमेल बिठाना था। साथ ही सरकार का समर्थन कर रही पीडीएफ की जिम्मेदारी भी थी। ऐसे में जो निर्णय सीएम रावत ने लिए वो परिस्थितियों के मुताबिक ठीक थे। मंत्रिमंडल में जगह भले ही ना मिली हो लेकिन, सरकार ने भगवानपुर में काम बहुत किए हैं। ये यहां के लोगों का सम्मान है।
प्रश्न— भगवानपुर की प्रमुख समस्याएं क्या हैं।

उत्तर— भगवानपुर में पिछले पांच सालों में काफी काम हुआ है। यहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम किया गया है। फिर भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी काम किया जाना बाकी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही युवाओं को रोजगार ​उपलब्ध कराने को लेकर प्रयास जारी है।

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