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इस नाम से जाना जाएगा हरिद्वार रेलवे रोड, मंत्री मदन कौशिक ने किया ऐलान

चंद्रशेखर जोशी।
हरिद्वार रेलवे रोड को नया नाम मिल गया है। हरकी पैडी जाने वाले इस मुख्य मार्ग को स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री नाम से जाना जाएगा। इसकी घोषणा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने शुक्रवार को स्वामी श्यामसुंदर दास शास़्त्री की श्रद्धांजलि सभा में किया गया है। मंत्री मदन कौशिक ने ये भी ऐलान किया कि स्वामी जी के नाम से एक घाट भी बनाया जाएगा।
जूना पीठाधीश्वर आचार्य म.म.स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज एक युग पुरूष थे। जिन्होंने संस्कृत व संस्कृति की उन्नति एवं समाजसेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित किया। भारतीय संस्कृति के त्यागपूर्ण आदर्श जीवन को आत्मसात करने वाले ऐसे महापुरूष को संत समाज नमन करता है। उक्त उद्गार उन्होंने श्री साधु गरीबदासीय आश्रम ट्रस्ट में ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों, षड़दर्शन साधु समाज, भारत साधु समाज एवं समाजसेवी एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संपन्न हुए श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन म.म.डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज संत समाज के शिक्षक, प्रेरक व मार्गदर्शक थे। संत समाज के संकल्पों को साकार करने में उन्होंने सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तराखण्ड सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने प्रदेश सरकार की और से ब्रह्मलीन म.म.डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज संत समाज की विलक्षण विभूति थे। जो विद्वता के साथ सरलता, नम्रता एवं सहिष्णुता की त्रिवेणी में मग्न रहते थे। भारतीय वैदिक सनातन धर्म का प्रचार संस्कृत एवं संस्कृति की उन्नति उनके जीवन का मूल उद्देश्य था। राष्ट्र कल्याण में उनके अहम योगदान को सदैव याद किया जाएगा।
उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार की और से रेलवे रोड़ का नामकरण स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज मार्ग किए जाने की घोषणा करते हुए ऋषिकुल पुल के समीप डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री गंगा घाट बनाए जाने की घोषणा भी की। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष म.म.स्वामी चिदानन्द मुनि एवं श्री जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी बह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज गरीबदासी संप्रदाय के उच्च कोटि के विद्वान तथा बहुमुखी व्यक्तित्व, सरलता की प्रतिमूर्ति थे। जिनका संपूर्ण जीवन संस्कृत शिक्षा के प्रचार, संत समाज की सेवा एवं समाज के समग्र कल्याण के लिए समर्पित रहा।
भारत साधु समाज के पंजाब एवं जम्मू प्रांत के अध्यक्ष म.म.स्वामी महादेव महाराज ने कहा कि डा.श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज त्याग एवं तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति और संपूर्ण संत समाज के प्ररेणा स्रोत थे। जिन्होंने युवाओं में देश भक्ति तथा स्वावलंबन की भावना जागृत करने, उन्हें नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना एवं सभी पंथ एवं संप्रदायों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाने में अपना सक्रिय योगदान दिया। समाज कल्याण में उनके अतुलनीय योगदान का संत समाज सदैव आभारी रहेगा।
श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज संत समाज की मुकुटमणी तथा सर्वप्रिय संत थे। स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके जीवन आदर्श सभी को संत सेवा तथा राष्ट्र कल्याण में योगदान के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
म.म.स्वामी हरिचेतनानंद एवं स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज एक दिव्य महापुरूष थे। जिनका जीवन समाजसेवी, परोपकारमय, अनुशासन प्रिय व तप त्यागमय तथा साधनायुक्त था। बिखरे हुए समाज को एक मंच पर लाना सर्वधर्म समभाव की भावना को बढ़ावा देना, भारत की संत परंपरा का संवर्द्धन करना व समाज के सभी वर्गो को सम्मान देना उनके जीवन का मूल उद्देश्य था।
श्रद्धांजलि सभा को अध्यक्षीय पद से संबोधित करते हुए म.म.स्वामी परमात्मदेव महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज ज्ञान के अथाह सागर थे। उन्होंन अपनी ज्ञान गंगा से संपूर्ण भारत का पवित्र किया। सादा, सरल व अलोकिक जीवन जीने वाले ब्रह्मलीन स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री का जीवन दर्शन और उनकी स्मृतियां सभी को सदैव समाज व राष्ट्र कल्याण के लिए प्रेरित करती रहेंगी। गौरक्षा आंदोलन, संस्कृत शिक्षा के उत्थान में उनका महत्वपूर्ण योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
श्री साधु गरीबदासीय आश्रम ट्रस्ट के उत्तराधिकारी स्वामी हरिहरानंद शास्त्री महाराज एवं स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए जो उत्तरदायित्व पूज्य गुरूदेव द्वारा उन्हें सौंपा गया है। उसका पूरी निष्ठा व कर्मठता से निर्वहन करेंगे। गरीबदासीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए पूज्य गुरूदेव द्वारा गंगा तट से शुरू किए गए समाज सेवा के प्रकल्पों में निरंतर बढ़ोतरी कर संस्था का गौरव बढ़ांएगे।
श्रद्धांजलि सभा में पधारे संत महापुरूषों और गणमान्य लोगों का मुख्य ट्रस्टी संजय वर्मा, अजय कुमार कुमार, संजय सहगल, मंशा रामकिशान, सुशील चैहान, विधायक आदेश चैहान, सुभाष चंद, विकास तिवारी, नीरज कुमार कुमार, अनिल खुराना, आनन्द भट्ट, पंडित अधीर कौशिक, पदम प्रकाश सुवेदी, विष्णु दत्त राकेश आदि ने फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया।
श्रद्धांजलि समारोह में स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती, महंत रविन्द्रपुरी, कोठारी महंत जसविन्द्र सिंह, महंत प्रेमदास, संत जगजीत सिंह, स्वामी शंकरानंद, म.म.स्वामी कपिलमुनि, कथा व्यास रामजी पाण्डे, महंत रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी विज्ञानानन्द, स्वामी शिव प्रेमानन्द, स्वामी ललितानन्द गिरी, आईडी शास्त्री, भक्त दुर्गादास, स्वामी रघुवंश पुरी, स्वामी अनन्तानन्द, स्वामी ऋषि रामकिशन, स्वामी शिवानंद भारती, महंत विष्णुदास, महंत रघुवीर दास, स्वामी भगवतस्वरूप, राजमाता आशाभारती, स्वामी ज्ञानानन्द, स्वामी अमृतानन्द, स्वामी साधनानन्द, स्वामी विश्व आत्मानन्द, महंत श्यामप्रकाश, महंत विनोद महाराज, स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी जगदीशानंद, महंत प्रेमसिंह, श्रीमहंत विनोद गिरी आदि सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों ने ब्रह्मलीन स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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