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जनहित में जज दीपाली शर्मा का मुकदमा वापस, कोर्ट ने लगाई मुहर

कुणाल दरगन।
हरिद्वार जिला कोर्ट में सिविल जज रही जज दीपाली शर्मा को Trafficking of person और बाल उत्पीडन जैसी संगीन धाराओं से एडशिनल डिस्ट्रिक्ट जज द्वितीय कोर्ट ने उन्मोचित (डिस्चार्ज) कर दिया है। गौरतलब है कि 28 अगस्त 2019 को राज्य सरकार ने जज दीपाली शर्मा के खिलाफ सिडकुल थाने में दर्ज मुकदमे को जनहित बताते हुए वापस लेने का फैसला किया था। इसके बाद ही ​अभियोजन पक्ष की ओर से हरिद्वार सीजेएम कोर्ट में मुकदमा वापसी के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। लेकिन इस प्रार्थना पत्र को सीजेएम कोर्ट ने सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी की आपत्ति पर 21 नवंबर 2019 निरस्त कर दिया था। इसकी अपील में ही अभियोजन पक्ष की ओर से केस वापसी लेने के लिए जिला जज कोर्ट में अपील की थी और अपील पर सुनवाई करते हुए एडीजे द्वितीय सहदेव सिंह की कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया और जज दीपाली शर्मा को सभी आरोपों से डिस्चार्ज करने का फैसला पांच सितम्बर को सुनाया। ये जज दीपाली शर्मा के बडी राहत देने वाला फैसला है। वहीं आपत्तिकर्ता जेपी बडोनी की आपत्ति को भी निरस्त कर दिया गया है। वहीं जेपी बडोनी ने इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाने की बात कही है।

———क्या है पूरा मामला———
हाईकोर्ट नैनीताल पहुंची एक गुमनाम ईमेल के बाद 29 जनवरी 2018 को तत्तकालीन जिला जज की अगुवाई में पुलिस की एक टीम गठित हुई और जज दीपाली शर्मा के आवास से 14 साल की लडकी को आजाद कराया गया। आरोप था कि बच्ची को खाना नहीं दिया जाता है और उसे सर्दी में भी गर्म कपडे नहीं मिलते हैं और उसे मारा जाता है। बच्ची का मेडिकल कराया गया और मेडिकल में 20 नई और पुरानी चोटों के निशान होने की पुष्टि हुई। हालांकि मेडिकल करने वाले डॉक्टर एके सिंघल ने बताया था कि चोटें गंभीर प्रकृति की नहीं थी। पीडित बच्ची नैनीताल जनपद के पदमपुरी गांव की रहने वाली थी। बच्ची के 164 के बयान दर्ज करने के बाद उसे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया।
इधर, 19 फरवरी 2018 को जज दीपाली शर्मा के खिलाफ सिडकुल थाने में आईपीएस आॅफिसर और तब सीओ सदर रही रचिता जुयाल ने आईपीसी की धारा 323, 370 उपधारा एक, चार और सात व धारा 75 जुविनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया।

—————चार्जशीट भी हुई दाखिल———
इस मामले में पुलिस ने जांच की ओर जांच के 20 अप्रैल में मुकदमे में चार्जशीट भी दाखिल कर दी। जांच में ये बात सामने आर्इ् कि बच्ची को 2015 में लाया गया और 2018 तक पीडिता का नाममात्र के लिए स्कूल में एडमिशन कराकर घर में उसे काम कराया गया और उसका शारीरिक व मानसिक शोषण किया गया। यहीं ने जज दीपाली शर्मा पर लोक सेवक के पद पर रहते हुए ये सब करने के मामले में संबंधित धाराओं में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।

———सरकार ने जनहित में लिया केस वापस———
चार्जशीट के बाद केस ट्रायल पर आने से पहले राज्य सरकार ने जज दीपाली शर्मा के खिलाफ केस को लोकहित में बताते हुए वापस ले लिया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में केस वापसी का प्रार्थना पत्र दिया लेकिन सीजेएम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। वहीं अपील में एडीजे द्वितीय कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए जज दीपाली शर्मा को आरेपों से डिस्चार्ज कर दिया।

—————फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे जेपी बडोनी———
सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने बताया कि जिला जज और सीनियर पुलिस अफसरों की मौजूदगी में बच्ची को आजाद कराया गया था और केस में चार्जशीट भी दाखिल हुई थी। लेकिन राज्य सरकार ने जनहित में केस को वापस लेने का फैसला किया है। इसे माननीय कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस फैसले को आगे चुनौती दी जाएगी। लेकिन एक ओर जहां बेटी बचाओ—बेटी पढाओ का नारा केंद्र की मोदी सरकार देती है वहीं राज्य सरकार ऐसे मामलों में केस को जनहित में बताकर वापस ले रही है।

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