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जमीयत उलेमा हिंद और आरएसएस की मुलाकात इमरान मसूद ने खडे किए सवाल, काफी कुछ कहा

चंद्रशेखर जोशी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इमरान मसूद ने हाल ही में जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात पर सवाल खडे करते हुए कहा कि जिस तरह से जमीयत उलेमा हिंद के सदर अरशद मदनी के साथ आरएसएस मुख्यालय में व्यवहार हुआ वो दुर्भाग्यपूण है। अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को ना तो कोई रिसीव करने आया और ना ही उन्हें कोई बाहर छोडने आया। ये पूरी तरह से उनका अपमान है। उन्होंने सवाल पूछा है कि मौलाना अरशद मदनी किस हैसियत से आरएसएस प्रमुख से मिलने गए थे और अगर वो मुसलमानों के रहनुमा के तौर पर वहां गए थे और ये पूरी कौम का अपमान माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस की सोच और विचारधारा बिल्कुल साफ है और हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इमरान मसूद ने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी पर कोई बात नहीं हो रही है। जबकि केंद्र सरकार मुद्दों को भटकाने का काम कर रही है।

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मुसलमानों के पिछडेपन के जिम्मेदार रहनुमा
हरिद्वार के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि मुसलमानों के पिछडेपन की जिम्मेदारी सभी को लेनी होगी। राजनीति रहनुमाओं को भी और मजहबी रहबरों को भी। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षा पर जोर देना होगा और इसके लिए जो काम करना पडे वो करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की सरकारों को भी ये ध्यान देना होगा कि भारत के प्रमुख आबादी वाले अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाए बिना तरक्की का रास्ता नहीं निकल सकता है।

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जकात के मसले पर भी रखी राय
प्रेस वार्ता में इमरान मसूद से ये सवाल किया गया कि इस्लामी शरीयत में हर साल प्रत्येक मुसलमान को कुल आय और संपत्ति का ढाई प्रतिशत जकात के रूप में दान करना होता है। बावजूद इसके मुसलमानों की आर्थिक स्थिति खराब है। इस पर उन्होंने कहा कि ये बहुत बडा मसला है और इस मामले को सभी को मिलकर देखना होगा। हमें शिक्षा पर जोर देना होगा। पूर्व में देवबंद में कुछ धर्मगुरुओं की ओर से इस और कदम बढाए गए। लेकिन अंदरूनी राजनीति के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य पर किए जाने वाला काम अपने मकसद को पूरा नहीं कर पाया। लेकिन इस बारे में सोचने की जरूर आवश्यकता है।
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तीन तलाक और 370 पर भी बोले इमरान
तीन तलाक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए घरों को तोडा जा रहा है। जबकि तीन तलाक का कोई वजूद ही नहीं है। इसलिए ये कानून सिर्फ मुस्लिम घरों को तोडने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का ताज और अभिन्न अंग है। सरकार को 370 हटाने से पहले स्थानीय कश्मीरियों को विश्वास में लिया जाना चाहिए था। वहां की विधानसभा में पास कराकर पारित करना चाहिए था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जावेद साबरी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की हालात पर कोई बात नहीं कर रहा है। देश में मुद्दों से भटकाने के लिए पाकिस्तान का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि पाकिस्तान हमारे सामने कुछ नहीं है। उसकी औकात कुछ नहीं है।

3 Replies to “जमीयत उलेमा हिंद और आरएसएस की मुलाकात इमरान मसूद ने खडे किए सवाल, काफी कुछ कहा

  1. जमीयत उलेमा हिन्द के सदर अरशद मदनी जी को जमीयत का काम नय सिरे से करना चाहिय

  2. जमीयत उलेमा हिन्द के सदर अरशद मदनी जी को जमीयत का काम नय सिरे से करना चाहिय
    बहुत सारे मुसलमान तो जमीयत के काम को जानते
    ही नही, ओर जो जानते है तो सिर्फ फतवे तक ही

  3. माफ करना कोम आपको बेबसी आंखों से देख रही
    ओर आप मोहन को

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