acharaya balkrishna condition is not good admitted in AIIMS rishikesh
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हजारों करोड़ का कारोबार छोड़ संन्यासी बनेंगे आचार्य बालकृष्ण, क्या अभी भी है जान का खतरा

चंद्रशेखर जोशी।
पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के महामंत्री और हजारों करोडों रुपए का कारोबार संभालने वाले योग गुरु बाबा रामदेव के पार्टनर आचार्य बालकृष्ण सबकुछ त्याग संन्यासी बनने जा रहे हैं। ये ऐलान अखिल भारतीय अ​खाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने हरिद्वार में शनिवार को किया है। उन्होंने दावा किया है क आचार्य बालकृष्ण ने मुलाकात के बाद निरंजनी अखाडे से जुडने की बात पर सहमति जता दी है। वहीं दूसरी ओर आचार्य बालकृष्ण को नशीला पेडा देेकर नुकसान पहुंचाने और उनके बीमार होने के बाद तेजी से बदले इस घटनाक्रम ने लोगों को हैरत में डाल दिया है। अभी कयासों का दौर थमा भी नहीं था कि एक बार फिर इस ऐलान से चर्चा है कि क्या आचार्य बालकृष्ण अभी भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और महामंडलेश्वर बन वो खुद को सुरक्षित करना चाहते हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों आचार्य बालकृष्ण को संदिग्ध परिस्थितियों में उनके कार्यालय में ही नशीला पेडा देकर जान से मारने का प्रयास किया गया था। हालांकि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया था जहां से उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स में भी ये बात सामने आई थी कि उनको कुछ नशीला पदार्थ दिया गया है। बाबा रामदेव ने भी इसे षडयंत्र बताया था लेकिन इस मामले की अभी तक जांच नहीं कराई गई ना ही पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई।
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क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार
अपराध जगत की खबरों पर पैनी नजर रखने वाले अमर उजाला के वरिष्ठ अपराध संवाददाता कुणाल दरगन ने बताया कि आचार्य बालकृष्ण का पूरे विश्व में नाम है और उनको जिस तरह से पेडा देकर नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया और उसके बाद अब संन्यासी बन महामंडलेश्वर बनने का फैसला कहीं ना कहीं सवाल खडे करता हैं। सवाल ये कि आखिर उनका ये कदम क्या खुद को सुरक्षित करने के लिए हैं। अगर ऐसा है तो वो कौन लोग हैं जो आचार्य बालकृष्ण जैसी बडी हस्ती और देश में योग और आयुर्वेद को पहचान दिलाने वाले व्यक्तिव को नुकसान पहुंचाना चाहता है। क्या आचार्य बालकृष्ण अभी भी खुद को सुरिक्षत महसूस नहीं कर रहे हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए थी। लेकिन जांच ना होना भी कई तरह की अफवाहों को हवा दे रहा है।

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क्या बोले परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी
महंत नरेंद्र गिरी ने हरिद्वार में एक धार्मिक आयोजन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दो साल पहले उन्होंने आचार्य बालकृष्ण को अखाडे का महामंडलेश्वर बनने का प्रस्ताव दिया था। उनके बीमार होने के बाद शुक्रवार को वो आचार्य बालकृष्ण से मिले थे और अब उन्होंने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कहा कि आप कब मुझे महामंडलेश्वर बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण को कुंभ 2021 से पहले संन्यास की दीक्षा दी जाएगी और इसके बाद उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया जाएगा।
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क्या है अखाडे का नियम
अखाडे के नियमानुसार जो भी संन्यास ग्रहण कर अखाडे में शामिल होता है तो उसकी संपत्ति भी अखाडे के अधीन आ जाती है। और मरने के बाद उसकी संपत्ति का ​वारिस भी अखाडा ही होता है। ऐसे में आचार्य बालकृष्ण जो हजारों करोडों रुपए के कारोबार को खडा करने में बाबा रामदेव के साथ बराबर के हिस्सेदार हैं, अपनी संपत्ति को अखाडे में लाना भी जरूरी होगा। या तो उन्हें सबकुछ छोडकर आना होगा या फिर उनकी संपत्ति अखाडे के अधीन आएगी। हालांकि अभी स्थिति साफ नहीं है कि आगे क्या होने वाला है। फिलहाल चर्चाओं का बाजार गरम है।

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