दक्षिण के दार्शनिक को हरिद्वार में नही मिली जगह, दोषी कौन

– सांसद तरुण विजय ने दिखाई हड़बड़ी, प्रशासन भी नाकाम, गुप्तचर विफल
ब्यूरो। तमिल भाषा के महान दार्शनिक और कवि थिरूवल्लूवर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए हरिद्वार में जगह नहीं मिल पाई। इसका दोषी कौन है क्या हरिद्वार की संत और पुरोहित दोषी है जिन्होंने मूर्ति स्थापना का विरोध किया या फिर आयोजक सांसद तरुण विजय की जल्दबाजी और प्रशासन से तालमेल ना बिठाना दोषी है, या फिर प्रशासन की नाकामी इसका बड़ा कारण है।
कौन हैं संत थिरूवल्लूवर
संत थिरूवल्लूवर को तमिलनाडू में महान सुधारक और दार्शनिक कवि की तरह पूजा जाता है। ईसा पूर्व तीन शताब्दी में थिरूवल्लूवर का जन्म माना जाता है। थिरूवल्लूवर के ग्रंथ थिरूककूरल बहुत प्रचलित है। देश ही नहीं विदेशों में भी इस महान संत को पढ़ा जाता है। दुनिया की कई भाषाओं में उनके प्रवचनों का अनुवाद हो चुका है। विदेशों में भी उनकी प्रतिमाएं हैं और कन्याकुमार के पास सागर में उनकी विशाल प्रतिमा बनाई गई है।

क्या था मामला
इन संत की प्रतिमा लगाने के लिए राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने अपनी सांसद निधि से बीस लाख रुपए दिए। कार्यक्रम को 29 जून दिन बुधवार को होना था। इसके लिए पंजाब, मेघालय, यूपी, उत्तराखण्ड और महाराष्ट्र के राज्यपालों को न्यौता भेजा गया था। दक्षिण भारत सहित देश की कई राजनीतिक हस्तियों को बुलाया गया था। इसके आयोजन राज्यसभा सांसद तरुण विजय थे।

क्यों हुआ विवाद
पहले हरिद्वार में सीसीआर टॉवर के पास गंगा किनारे इनकी मूर्ति लगाई जानी थी। लेकिन, वहां गंगा सभा के पुरोहितों ने इसका विरोध कर दिया। बाद में आनन-फानन में मंगलवार को शंकराचार्य चौक पर सिंचाई विभाग की जमीन पर मूर्ति स्थापना करने का निर्णय लिया गया। लेकिन मंगलवार रात को यहां संतों ने इसका विरोध कर दिया। प्रशासन के लोगों को भी खूब खरी खोटी सुनाई गई। विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। डीएम ने सीएम हरीश रावत को सारी बात बताई। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से राज्यपालों को गरिमा के अनुरूप कार्यक्रम न होने का पत्र भी लिख दिया गया। लेकिन, इस पर तरुण विजय बिफर गए और उन्होंने जल्दबाजी में ही मूर्ति का अनावरण करने का ऐलान कर दिया। मूर्ति को डाम कोठी परिसर में रखा गया और वहां उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक और मेघालय के राज्यपाल पहुंच गए। जबकि उत्तराखण्ड और पंजाब के राज्यपाल ने अपना कार्यक्रम टाल दिया। महाराष्ट्र के राज्यपाल के आने की संभावना नहीं बन रही थी। वहीं सीएम हरीश रावत ने भी कार्यक्रम को टाल दिया था। साथ ही जल्द ही सही जगह जमीन तलाशने के बाद मूर्ति की स्थापना करने के निर्देश दिए थे।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिलाधिकारी हरबंश सिंह चुघ ने बताया कि मूर्ति लगाने के लिए सांसद तरुण विजय ने हमसे तालमेल नहीं बिठाया। सब कुछ अपने आप किए जा रहे थे। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने मंगलवार रात को हुए विवाद के बाद अपनी ओर से कार्यक्रम को निरस्त कर दिया था। इस संबंध में सभी राज्यपालों को सूचित भी कर दिया गया था। सीएम को भी बता दिया गया था। पंजाब और उत्तराखण्ड के राज्यपाल व सीएम हरीश रावत भी हमारी बात से सहमत थे। इतनी जल्दबाजी में चीजें की जा रही थी, जो हमारी समझ से परे हैं। जल्द ही सही जगह तलाश कर मूर्ति की स्थापना की जाएगी।

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