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एनजीटी : अब तक छह होटल हो चुके हैं सीज

ब्यूरो। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन नहीं करने के कारण हरिद्वार के छह बड़े होटलों पर गाज गिर चुकी है। मंगलवार को दो बड़े होटलों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीज कर दिया। वहीं 20 कमरों से अधिक के होटलों पर ​सीवेज ​ट्रीटमेंट प्लांट को आवश्यक बनाए जाने के बाद हरिद्वार के सैंकड़ों होटलों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। वहीं एनजीटी के आदेशों के बाद होटल व्यवसासियों और आश्रम व धर्मशाला प्रबंधकों की चिंताएं बढ़ गई है।

गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी ने पूर्व में पचास कमरों से अधिक वाले होटाल, धर्मशाला और आश्रमों को अपना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के आदेश दिए थे। इस संबंध में होटलों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी अनुमति लेनी थी। अब तक बोर्ड जिला प्रशासन के साथ मिलकर हरिद्वार के छह बड़े होटलों को सीज कर चुका है। इनमें सिडकुल में स्थित रेडिसन ब्ल्यू, होटल प्रिंस, होटल विवेक, शिव साई, शिवमूर्ति और होटल चोटीवाला शामिल हैं। इन सभी होटलों को पहले नोटिस दिया गया था। नोटिस के अनुसार कार्रवाई ना करने पर सभी होटलों को सीज कर दिया गया है। बार्ड के स्थानीय प्रमुख अंकुर कंसल ने बताया कि मंगलवार को दो होटलों को सीज किया गया है। अब तक छह होटल सीज हो चुके हैं, जल्द ही कई दूसरे होटलों को सीज किया जा सकता है।

नए आदेश से बढ़ेगी मुश्किलें
हाल ही में एनजीटी ने एक नया आदेश पारित किया है, इसमें बीस से अधिक कमरों वाले होटलों को अपना एसटीपी लगाना अनिवार्य किया गया है। हरिद्वार में अधिकतर होटल छोटे हैं और बीस और तीस कमरों वाले हैं। लिहाजा, ऐसे होटल भी इस दायरे में आ गए हैं। वही होटल एसोसिएशन हरिद्वार के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने बताया कि एनजीटी का आदेश किन परिस्थितियों में आया है, इसे समझने की आवश्यकता है। ये भी हो सकता है कि स्थानीय एजेंसियों ने हरिद्वार की सही सूरत एनजीटी के सामने नहीं रखी है। व्यवहारिक तौर पर ये सही नहीं दिखता है। वही आश्रम प्रबंधक समिति के अध्यक्ष विकास तिवारी ने कहा कि ये बड़ा ही हैरान करने वाला आदेश है। होटलों के पास जगह नहीं है, ऐसे में किस तरह से वो अपना एसटीपी स्थापित करेंगे। इसके लिए कोई बीच का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
क्यों है स्थिति
हरिद्वार में करीब चार सौ होटल हैं। इनमें से अधिकतर गंगा किनारे बसे हुए हैं। इन होटलों का सीवर और वेस्ट वॉटर ड्रेनेस सिस्टम के जरिए जगजीतपुर स्थित एसटीपी में जाता हैं। जगजीतपुर स्थिति एसटीपी की क्षमता केवल 45 एमएलडी की है। जबकि हरिद्वार की आबादी लगातार बढ़ रही है और हरिद्वार आने वाले पर्यटकों की संख्या को देखते हुए ये बहुत कम है। लिहाजा, एनजीटी ने होटल कारोबारियों और आश्रम, धर्मशाला प्रबंधकों को अपना एसटीपी लगाने का आदेश पारित किया है। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब आदेश का पालन कराने संबंधी कार्रवाई कर रहा है। लेकिन, ये लोहे के चने चबाने से कम नहीं होगा।

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