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‘हमें नहीं चाहिए नालियां साफ करने वाला सीएम, डेंगू—मलेरिया की जांच तो कराओ सीएम साहब’

 

— हरिद्वार के सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रही जांच, मरीजों को भेजा जा रहा है निजी अस्पताल
ब्यूरो। हरीश रावत के बढ़ते उत्तराखण्ड की तस्वीर बहुत भद्दी है। रावत सरकार के सरकारी अस्पताल बुखार से तप रहे मरीजों को चक्कर कटाने के बाद वापस लौटा रहे हैं। हरिद्वार के जिला और मेला अस्पताल में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और प्लेटलेट्स जांच का काम ठप पड़ा है। इसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। यही नहीं दोनों अस्पतालों के सीएमएस मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। अस्पतालों से चक्कर काट कर लौटने वाले मरीज सिर्फ यही कह रहे हैं कि हमें नालियां साफ करने वाला सीएम नहीं चाहिए, कुछ करना है तो सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधार दो, डेंगू—मलेरिया की जांच करा दो।

हरिद्वार में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ रही हैं। अधिकतर मरीज सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। लेकिन, इन दोनों ही अस्पतालों में इलाज तो छोड़िए इन तीनों जानलेवा बीमारियों की जांच के लिए व्यवस्था नहीं है। पिछले कई दिनों से जांचें ठप पड़ी हैं और ​अधिकारी एसी में बैठकर डेंगू से लड़ने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। हालात इतने बुरे हैं कि मरीजों को देख रहे डॉक्टर भी व्यवस्था पर अपना माथा पकड़ लेते हैं। मरीजों को भरे मन से ना कहना पड़ रहा है और सीएम साहब नालियां साफ करते घूम रहे हैं।

क्यों आई दिक्कत
असल में उत्तराखण्ड में पिछले एक साल से सरकारी अस्पतालों में दिक्कत बनी हुई है। दवा खरीदने के लिए बनाई गई नई नीति के कारण अस्पताल आवश्यक सामान नहीं खरीद पा रहे हैं। इसमें बदलाव भी नहीं किया जा रहा है। ना ही डीजी हैल्थ अपने स्तर से ही दवा खरीद कर अस्पतालों को दे रहे हैं। इसके कारण अस्पताल में आवश्यक सामान खत्म हो गया है और जांचें ठप हो गई है।
प्लेटलेट् जांच भी नही हो रही
इन तीनों ही तरह के बुखार में प्लेटलेट्स कम हो जाती है। डॉक्टर इलाज के लिए बार—बार प्लेटलेट्स जांच कराते हैं। लेकिन, अस्पताल में भर्ती मरीजों के सैंपल भी तीमारदारों को बाहर कराने पड़ रहे हैं। इससे आप व्यवस्था का सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं। प्लेटलेट्स की जांच के लिए मशीन खराब पड़ी है।

झूठ बोलते हैं सीएमएस
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आरती ढोढियाल और मेला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एचके सिंह वैसे तो चापलूस पत्रकारों और नेताओं पूछने पर कह देते हैं कि सब व्यवस्था सही चल रही है। जेकिन, जब जांच कराने के लिए कोई जाता है तो दोनों ही अस्पताल उन्हें लौटा देते हैं। बस अधिकारी अपने एससी रूम में बैठने कर जबानी जमाखर्च में लगे हुए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आरती ढोढियाल ने बताया कि मशीन खराब होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। मलेरिया की जांच इसलिए नहीं हो रही है कि हमारे पास ब्लड सैंपल लेने के लिए व्यवस्था नहीं है। वहीं डेंगू की किट भी खत्म हो गई है। हम आला अधिकारियों को बता रहे है। जब उनसे पूछा गया कि आप तो सब सही होने की बात जनप्रतिनिधियों को बताते हैं तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वो सिर्फ यही कह पाई कि हम क्या कर सकते हैं व्यवस्था ही ऐसी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने नही की बात
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से जब इस संबंध में फोन पर जानकारी चाही तो किसी दूसरे व्य​क्ति ने फोन उठाया और मंत्री जी को व्यस्त होने की बात कही। जब उन्हें हरिद्वार के अस्पतालों के हालातों के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि वो मंत्री जी तो सब बता देंगे। लेकिन, उसके बाद उन्होंने कोई बात नहीं की।

 

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