महिला संतों के परी अखाड़े को कराया जाए शाही स्नान, एक करोड़ भी मांगे, अखाड़ा परिषद ने क्या कहा

रतनमणी डोभाल।
खुद को महिला शंकराचार्य और महिला संतों के परी अखाड़े की प्रमुख बताने वाली साध्वी त्रिकाल भवंता ने हरिद्वार में मंगलवार को कुंभ मेला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात कर अन्य अखाड़ों को कुंभ में दी जाने वाली सुविधाओं और सहायता की तरह ही परी अखाड़े को भी सभी प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग की है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अखाड़ा परिषद के सभी 13 अखाड़ों को एक—एक करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की थी और अब परी अखाड़े ने भी सरकार द्वारा जारी सभी सुविधाओं का मांगा है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद कुंभ में भी उन्हें यूपी सरकार की ओर से सहायता दी गई थी और उत्तराखण्ड में 2016 अर्धकुंभ में भी उन्हें सरकार द्वारा सुविधाएं मुहैया कराई गई थी। लिहाजा उन्हें 2021 में होने वाले हरिद्वार कुंभ के लिए अखाड़े के तौर पर मुहैया कराए जाने वाली सभी सुविधांए उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं मेला प्रशासन की ओर से उन्हें अभी कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। हालांकि उनके आवेदन को रख लिया गया है।
अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने बताया कि अखाड़े के तौर पर उन्होंने सुविधाओं की मांग की। लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं अखाड़ा परिषद ने परी अखाडे को फर्जी बताया है और साध्वी त्रिकाल भवंता को फर्जी संत बताया है।
परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि अखाड़ा परिषद ने पहले ही त्रिकाल भवंता को फर्जी संत घोषित कर दिया था। उन्होंने परी अखाडे को पूरी तरह फर्जी बताया है और मेला प्रशासन से परी अखाड़े के आवेदन पर विचार ना करने का आग्रह किया है।

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