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महारत्न कंपनी बीएचईएल के चुनाव में शराब बनी चुनावी मुद्दा

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पचास हजार वाले मजदूर को परोसी जा रही शराब, बीएचईएल प्रबंधन खामोश
— बीएचईएल मान्यता चुनाव में यूनियनें पिला रही श्रमिकों को शराब
— शाम होते ही यूनियन कार्यालयों में शुरू हो जाता है शराब का दौर
— बीएचईएल चुनाव में शराब पिलाना बना चुनावी मुद्दा, बंटे पर्चे

एमएस नवाज, हरिद्वार।
देश की महारत्न कंपनी बीएचईएल के करीब पचास हजार रुपए तनख्वाह पाने वाले कामगारों को खुलेआम शराब ​पिलाई जा रही है। बीएचईएल मान्यता चुनाव में भाग ले रही अधिकतर यूनियनें श्रमिकों को शराब पिलाकर अपने पाले में बनाए रखने का प्रयास कर रही है। शराब और कबाब की दावतों के इस दौर में ​बीएचईएल के कर्मचारियों की भी खूब मौज आ रही है। शाम होते ही यूनियन कार्यालयों में पार्टी शुरू हो जाती है। हालांकि, कुछ यूनियनें शराब का विरोध भी कर रही है, लेकिन जब पचास हजार पाने वाला मजदूर भी शराब पीकर मदहोश होने लगे तो इनकी कौन सुनेगा। वहीं इस पूरे मामले में कंपनी प्रबंधन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। इस मुद्दे को अब कुछ यूनियन चुनावी मुद्दा भी बना रही है और पर्चे निकालकर श्रमिकों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसका असर भी हो रहा है।
देश की महारत्न कंपनी बीएचईएल बुरे दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां नए काम के आर्डर का टोटा कंपनी को घाटे की ओर ले जा रहा है, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों की चुनौतियों ने भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। अधिकारियों की लंबी फौज कंगाली में आटा गीला करने से कम नहीं है। ऐसे में सरकार लगातार बीएचईएल में अपनी हिस्सेदारी घटा रही हैं। लेकिन, इन सब खतरों से अनजान पचास हजार रुपए प्रतिमाह तनख्वाह पाने वाला कंपनी का कुशल मजदूर बेफिक्र है। उस पर श्रमिकों के हितों की दुहाई देने वाली श्रमिक यूनियनें अपने निजी फायदों के लिए कर्मचारियों के शराब परोस कर चुनाव जीतने में लगी है। बीएचईएल में इन दिनों मान्यता चुनाव चल रहे हैं और श्रमिकों को बरगलाया जा रहा है। इसमें स्थानीय यूनियनों से लेकर राष्ट्रीय स्तर से संबंधित यूनियनेें शामिल हैं। चुनाव में अभी तक कुल 10 यूनियनें मैदान में हैं। 2936 श्रमिकों वाले हीप प्लांट से तीन यूनियनों को चुनाव किया जाना हैं। ऐसे में कांटे की टक्कर होने के कारण यूनियनें पिछलें चुनावों की तरह ही शराब और कबाब के जरिए कर्मचारियों पर डोेरे डाले हुए हैं। वहीं कर्मचारियों के हितों के मुद्दे शराब की इन दावतों में पीछे छूट गए हैं। शाम होते ही भेल आवासीय कॉलोनी के सेक्टर वन और सेक्टर चार में मौजूद इन यूनियनों के कार्यालयों में दावतों का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन कंपनी प्रबंधन आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। चुनाव अधिकारी से लेकर जनसंपर्क विभाग के अधिकारी बात करने को राजी नहीं हैं।

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बीएमटीयू और सीटू ने किया विरोध
ऐसा नहीं है कि सभी यूनियनें शराब पिला रही है। कुछ यूनियनें इसका विरोध भी कर रही हैं। इसी तरह एक यूनियन भेल मजदूर ट्रेड यूनियन हैं जिसने इन दावतों को चुनाव में बड़ा मुद्दा बना दिया है। यूनियन के अध्यक्ष राज किशोर ने बताया कि श्रमिकों के मुद्दों के सामने शराब की दावतें बहुत भारी पड़ रही हैं। इन सबसे निपटना चुनौती है। हम कोशिश कर रहे हैं। हमने इस संबंध में अपना एक पर्चा भी निकाला हैं जिसे प्रत्येक श्रमिकों को बांटकर जागरूक किया जा रहा है। इसका असर भी दिख रहा है। वहीं सीटू की भेल कामगार यूनियन भी इसके विरोध में है। यूनियन के महामंत्री केएस गुंसाई ने बताया कि हर बार चुनाव में शराब पिलाकर मजदूरों को बरगलाया जाता है। हम लगातार इसका विरोध करते आ रहे हैं। हम शराब नहीं पिलाते और ना ही दावत कराते हैं, इसलिए हमें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता हैं। लेकिन, हम अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करेंगे। सीटू ने इस चुनाव में प्रबंधन को आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत भी की थी, लेकिन प्रबंधन ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है और कंपनी प्रबंधन कुछ नहीं कर रहा है। ये बड़ी परेशानी करने वाली बात है।

क्या कहते हैं भेल के अधिकारी

भेल के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी राकेश मानिकताला को जब हमने फोन किया तो उन्होंने कई बार संपर्क करने के बाद भी फोन नहीं उठाया। इसके बाद उनसे सीनियर अधिकारी राजेंद्र कुमार को फोन किया तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। वहीं विभाग के जीएम राजीव भटनागर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने भी फोन नहीं उठाया। हालांकि जनसंपर्क विभाग का काम कंपनी से जुड़ी गतिविधियों के बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देना है, लेकिन अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है तो खुलेआम परोसी जा रही शराब की परवाह कैसे होगी।

कौन—कौन हैं मैदान में
यूनियन नाम पदाधिकारी
भेल मजदूर कल्याण परिषद — राजबीर सिंह चौहान
हिंद मजदूर सभा — एमपी सिंह
इंटक — राम कुमार
बीएमएस — कुमुद श्रीवास्तव
हैवी इलेक्ट्रिकल्स ट्रेड यूनियन — रामयश सिंह
एटक — आशीष सैनी
सीटू — केडी गुंसाई
भेल मजदूर ट्रेड यूनियन — राज किशोर
कर्मचारी परिषद — नरेंद्र सिंह चौहान

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