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कोरोना काल: अकेले हरिद्वार में दो लाख नौकरियां गई, औद्योगिक इकाईयों का सूरत—ए—हाल

कुणाल दरगन।
कोरोना महामारी के कारण देश भर में लाखों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पडा है। वहीं उत्तराखण्ड का औद्योगिक क्षेत्र वाला जनपद हरिद्वार कोरोना की इस मार से अछूता नहीं रहा। हरिद्वार के अलग—अलग औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित इकाईयों की बात करें तो एक अनुमान के मुताबिक इन संस्थानों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब दो लाखा लोगों ने रोजगार से हाथ धोया है। वहीं अभी भी 40 प्रतिशत इकाईयां ऐसी हैं जहां उत्पादन नहीं हो रहा है। जबकि साठ प्रतिशत इकाईयों में ही काम हो रहा है वो भी कम क्षमता से, यानी ​​जितना काम उतने ही लोगों को बुलाया जा रहा है। सबसे ज्यादा मार गैर फार्मा कंपनियों पर पडी है। वहीं फार्मा कंपनियों में भी महज सत्तर प्रतिशत क्षमता के अनुसार ही काम हो रहा है।
सिडकुल, हरिद्वार, लक्सर, भगनवानपुर, बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र में बडी छोटी करीब दो हजार औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें करीब चार लाख से ​अधिक लोग संगठित और असंगठित तौर पर काम करते हैं। ये इकाईयां बडे पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराती है। लेकिन, कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन में इकाईयां बद हो गई और अधिकतर मजदूर अपने घर चले गए, यही नहीं लॉकउाउन खुलना शुरू हुआ तो कंपनियों के पास काम नहीं था और इस दौरान कर्मचारियों को नहीं बुलाया गया।
सिडकुल मैनुफैकचरिंग एसोसिएशन आफ उत्तराखण्ड के जनरल सेकेट्ररी राज अरोडा ने बताया कि लॉकडाउन का गहरा असर औद्योगिक क्षेत्र में पडा है। यहां एक अनुमान के मुताबिक करीब दो लाख लोगों का रोजगार चला गया है। क्योंकि अभी तक महज साठ प्रतिशत इकाईयों में ही काम शुरू हो पाया है। जबकि अधिकतर इकाईयों में काम पूरी क्षमता के अनुसार नहीं हो पा रहा है। चूंकि बाजार में मांग नहीं है इसलिए उत्पादन भी नहीं हो रहा है। हालांकि, पिछले एक पखवाडे में हालात सुधरने की ओर कुछ संकेत मिले हैं लेकिन आने वाला भविष्य कैसा होगा, इस बारे में ज्यादा दावा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को हमारी मदद के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि सिडकुल और अन्य औद्योगिक इलाके बडे पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं। इसलिए कम से कम सरकार को रूटीन तौर पर होने वाली लाइसेंसी प्रक्रिया और निरीक्षणों से कम से कम एक साल तक निजात मिलनी चाहिए। क्योंकि इसमें हमारा काफी समय बरबाद हो जाता है। हालांकि हम सभी नियम और कानूनों को पहले की तरह मानते रहे हैं लेकिन हमें इस कागजी प्रक्रियाओं में आसानी दी जानी चाहिए।

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कोरोना से दो चार हो रही इकाईयां
हरिद्वार में कोरोना के मामले लगातार बढ रहे हैं। सिडकुल की इकाईयां भी इससे अछूती नहीं है। सिडकुल​ स्थित हिंदुस्तान यूनी​लीवर कंपनी में बडी संख्या में कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। वहीं जिलाधिकारी हरिद्वार सी रविशंकर ने सभी इकाईयों के कम से कम दस प्रतिशत कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। वहीं सही समय पर जानकारी ना देने के मामले में अब तक तीन कंपनियों के खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई हो चुकी है।

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