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धर्मनगरी में पहली बार शियाओं ने किया मातम, देखें वीडियो

परवेज आलम।
धर्मनगरी में पहली शियाओं ने मातमी जुलूस निकालकर करबला में सैकडों साल पहले दी गई शहादत को याद किया। हालांकि ये जुलूस सांकेतिक रूप में था और ज्वालापुर अहबाबनगर स्थित इमामबाडे के सामने ही ये मातम किया  गया। क्योंकि, पुलिस ने शियाओं को विरोध के चलते मातमी जुलूस निकालने की अनुमति नही दी थी।
अंजुमन फरोग ए अजा संस्था के सदस्य हैदर नकवी ने बताया कि हर साल मोहर्रम का मातम किया जाता है। यजीद ने करबला में इमाम हुसैन और उनके खानदान के लोगों को चार दिन तक भूखा रखकर मोहर्रम माह की दस तारीख को शहीद किया था। सचिव मुर्तजा हुसैन ने कहा कि यजीद बहुत जालिम इंसान था और उसने छह माह के बच्चों को भी बेरहमी से कत्ल कर दिया था। उनके परिवार की महिलाओं को भी यातना दी गई थी। इसी याद में शिया अपने शरीर को पीडा देकर करबला की शहादत को याद करते हैं।
धर्मनगरी में ज्वालापुर स्थित अहबाब नगर में शिया समुदाय का इमामबडा बना है। इसके बाद ही रविवार को शिया समुदाय के लोग एकत्र हुए और मातम मनाया। इस दौरान बडी संख्या में लोग उपस्थित रहे। वही सुरक्षा व्यवस्था के ​भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ज्वालापुर कोतवाल अमरजीत सिंह ने बताया कि जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। शिया समुदाय के लोगों ने इमामबाडे के बाहर ही मातम मनाया।

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