Newborn baby girl found in Haridwar

हरिद्वार में लावारिस मिली नवजात बच्ची को पुलिस ने किसको सौंपा, पढ़िए

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विकास कुमार।
13 फरवरी को बीएचईएल मध्य मार्ग के समीप एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली थी जिसे रानीपुर पुलिस द्वारा तत्काल हॉस्पिटल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया था। उसी दिन से पुलिस द्वारा बच्ची के स्वास्थ्य के सम्बंध में लगातार चिकित्सकों से संपर्क में रहकर बच्ची का आवश्यक ईलाज करवाया जा रहा था। हालांकि बच्ची को गोद लेने के लिए कई लोगों ने पुलिस और अस्पताल में संपर्क किया था। लेकिन गोद लेने की कानून में एक पूरी प्रक्रिया है और उस प्रक्रिया को पूरी करने के बाद ही बच्चे को गोद लिया जा सकता है।
वहीं पुलिस ने मंगलवार को चिकित्सकों द्वारा बच्ची को स्वस्थ्य बताते हुए हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया। रानीपुर कोतवाली प्रभारी योगेश देव ने बताया कि पुलिस ने बच्ची को नियमानुसार चाइल्ड वेल्फेयर कमिटी के समक्ष पेश किया गया तथा चाइल्ड वेल्फेयर कमिटी के आदेशानुसार बच्ची को शिशु अनाथालय, श्री राम आश्रम, श्यामपुर मे दाखिल किया गया। अब बच्ची की देखभाल यही की जाएगी जबकि पुलिस उसके माता—पिता या अन्य रिश्तेदारों की तलाश करेगी। वहीं बच्ची को गोद लेने वाले नियमानुसार एप्लाई कर सकते हैं।

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क्या है बच्ची को गोद लेने की प्रकिया
लावारिस मिले बच्चों को गोद लेने के लिए कई लोग पूछताछ कर रहे हैं। लेकिन किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए एक लंबी प्रक्रिया है और पूरी जांच के बाद ही आवेदन पर विचार किया जाता है। एडवोकेट एमएस नवाज ने बताया कि किसी भी बच्चे को लेने के लिए Adoption Regulations, 2017 में विस्तार से प्रक्रिया का जिक्र किया गया है। उन अनाथ या लावारिस या फिर परिवार द्वारा खुद सरेंडर किए गए बच्चों को गोद लिया जा सकता है जिन्हें कानूनी तौर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी गोद लेने के लिए अधिकृत करती है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी या सीडब्ल्यूसी किसी बच्चे के अनाथ या लावारिस मिलने पर सबसे पहले बच्चे के बायोलोजिकल या कानूनी माता—पिता/परिजनों की तलाश के लिए डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के जरिए प्रयास करती है। तय सीमा के अंदर और उचित प्रयासों के बाद भी अगर बच्चे के असली माता—पिता के बारे में कोई पता नहीं चलता है तो इसके बाद बच्चे को गोद दिए जाने के लिए अनुमति दे दी जाती है।

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कैसे करें एप्लाई
एडवोकेट एमएस नवाज बताते हैं कि बच्चे को गोद लेने के भारत सरकार के महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स एथोरिटी यानी कारा बनाई है। ​जिसमें सभी राज्यों के गोद लिए जाने वाले बच्चों का डाटा साझा किया गया है। इस वेबसाइट के जरिए गोद लेने वाले अभिभावक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं और आनलाइन ही अपने आवेदन का स्टेटस भी पता कर सकते हैं। इस लिंक के जरिए करें आवेदन https://carings.nic.in/Parents/parentregshow.aspx

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कौन ले सकता है गोद
एडवोकेट एमएस नवाज बताते हैं कि गोद लेने वाले पति—पत्नी का शारीरिक, मानसिक और इमोशनली तौर पर मजबूत होना बहुत जरुरी है। इसके अलावा उनकी माली हालत कैसी है और गोद लेने वाले व्यक्ति का किसी गंभीर बिमारी से ग्रसित नहीं होना चाहिए। यही नहीं पति—पत्नी दोनों की बच्चे को गोद लेने में सहमति का होना जरुरी है। वहीं अकेली महिला लडका या लडकी दोनों को गोद ले सकती है। लेकिन अकेला पुरुष लडकी को गोद लेने के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। पति—पत्नी के बीच वैवाहिक जीवन कैसा चल रहा है ये भी महत्व रखता है। जहां तक उम्र का सवाल है बच्चे की उम्र और गोद लेने वाले पति—पत्नी या सिंगल महिला, पुरुष की आयु भी निर्धारित की गई है। यही नहीं एक बार बच्चे को गोद लेने की सहमति बनने के बाद कोर्ट की प्र​क्रिया शुरु होती है और काबिल वकील के जरिए आप संबंधित क्षेत्र की कोर्ट में आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट आपको गोद लेने के आदेश दे देती है। यही नहीं गोद लेने की प्रक्रिया कोर्ट से पूरी होने के बाद भी एक या दो साल तक बच्चे का फीडबैक लिया जाता रहेगा।

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