हरकी पैडी पर रहस्मय लिपि वाली सीढ़ियों से उठा पर्दा, पाकिस्तान केे इस इलाके जुड़ा है संबंध

रतनमणी डोभाल।
विश्व प्रसिद्ध हरकी पैडी पर निर्माण कार्यों के दौरान प्रदर्शित हुई सदियों पुरानी ​पैड़ियों पर लिखी रहस्मयी लिपि से कुछ हद तक गुरुकुल के विशेषज्ञों ने पर्दा उठा दिया है। गुरुकुल कांगड़ी (विश्वविद्यालय) हरिद्वार के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रो0 प्रभात कुमार ने दावा किया है कि हरकी पैडी पर पुरानी सीढियों पर अंकित लिपि का संबंध पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से है। ये कुंडी जिसे मुरली लिपि भी कह सकते हैं ये जुडे आलेख हैं। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के वैश्य समुदाय इस भाषा का प्रयोग करते आए हैं। ये दौ सौ से तीन सौ साल पुरानी हो सकती हैं। हालांक ये लिपि अब वहां प्रचलित हैं या नहीं इसके बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि वर्तमान में वहां उर्द प्रचलित हैं और पाकिस्तान बनने के बाद वहां से बडी संख्या में हिंदुओं का पलायन होने के बाद अब उसके अस्तित्व पर भी सवाल हैं।
वहीं दूसरी ओर मुंडी लिपि के अलावा देवनागिरी लिपि भी अंकित हैं। ये भारतीय उपमहाद्वीप में प्रच​लित हैं और इन आलेखों में चार सौ से पांच सौ साल पुरानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब हरिद्वार से कोई पौराणिक आलेख या महत्व वाली वस्तुएं मिली हों, इससे पहले यहां से गुरुकुल ने गुप्त काल की वस्तुएं और लिपि की भी खोज की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने ये लि​पि मंसा देवी पर्वत माला पर एक खुदाई के दौरान की थी। उन्होंने बताया कि यहां से उन्हें उस काल की वस्तुएं भी मिली थी।

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सीढियों पर आलेख का क्या मतलब हो सकता है
वहीं प्रो. प्रभात कुमार से जब पूछा गया कि आखिर इन सीढियों पर आलेख का क्या मकसद हो सकता है तो उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कुंभ का हजारों सालों पुराना इतिहास है। ये ह्वेनसांग के यात्रा वृतांंत में भी देखने को मिलता है। ये हो सकता है कि कुंभ के दौरान पाकिस्तान के पंजाब वाले हिस्से से आए वैश्य समुदाय के लोगों ने ये अंकित कराया हो, क्योंकि प्राचीन समय में शिलालेखों पर अंकित कराने की परंपरा आम थी। वहीं गुरुकुल विवि के कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने बताया कि हरकी पैडी पर मिले आलेख बहुत महत्व के हैं और गुरुकुल इन लिपियों को पढकर पुराने इतिहास को विश्व के सामने लाने का काम करेगा।

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गंगा सभा भी आगे आई
वहीं पुरोहितों की संस्था गंगा सभा भी सीढियों के निर्माण के दौरान निकली पुरानी सीढियों के रखरखाव को आगे आया है। गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने बताया कि हरकी पैडी का हजारों साल पुराना इतिहास है और ये सीढियां इस बात की गवाह हैं। उन्होंने कहा कि गंगा सभा अपनी ओर से इस इतिहास को संरक्षित करने का काम करेगी और सरकार से भी मांग करती है कि पुरातत्व विभाग से इसके बारे में संपूर्ण जानकारी जुटाने के लिए खोज कराई जाए।

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