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हरिद्वार से बाहर यहां आयोजित होगा महाकुंभ 2021, ये है योजना

चंद्रशेखर जोशी।
महाकुंभ 2021 को शहर से बाहर ले जाने की योजना पर सरकार और अखाडे काम कर रहे हैं। ताकि हरिद्वार शहर में भीड के दबाव को कम किया जा सके और मेले की बेहतर व्यवस्थाएं की जाने में आसानी हो। शनिवार सरकार और अखाडों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई और दोनों ही पक्ष इसके लिए राजी भी है। लेकिन कुछ शर्तों के साथ। इसमें जमीन और पांच करोड रुपए प्रति अखाडे केा दिए जाने की मांग रखी गई है। हालांकि सरकार ने इस पर अभी तक अपनी हां नहीं की है। लेकिन अभी चर्चा जारी है।
सीसीआर टॉवर में आयोजित महाकुंभ की तैयारियों की बैठक को लेकर कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इनमें से सबसे प्रमुख था हरिद्वार कुंभ को शहर से बाहर नीलधारा और चंडीघाट के टापुओं पर आयोजित किया जाना। इसमें सरकार और अखाडों की तरफ से चर्चा शुरू हुई और दोनों ही इस बात पर सहमत दिखे।

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क्या बोले अखाडा परिषद के अध्यक्ष 
अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि सरकार की ओर से अखाडों की छावनियां हरिद्वार शहर से बाहर नीलधारा और चंडीघाट पुल के पास बनाने का प्रस्ताव दिया गया। ताकि शहर पर दबाव कम किया जा सके। इस पर हम सहमत हैं लेकिन हमें वहां स्थायी तौर पर जमीन आवंटित की जानी चाहिए। सभी 13 अखाडों को जमीन और पांच करोड रुपए आवंटित किए जाने चाहिए। ताकि अखाडे को वहां जाने में कोई दिक्कत ना हो। सरकार ने हमारी सभी मांगों पर अपनी सहमति जताई है।

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शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने दिया गोलमोल जवाब
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने संतों की जमीन और पांच करोड की मांग पर बडी समझबूझ से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कि आवश्यकता, उपलब्धता और नियमों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही जमीन आवंटन और बजट आवंटन पर फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखण्ड के पास वैसे ही जमीन की कमी है और बजट भी इतना नहीं है। लिहाजा, ऐसे में अखाडों की इस मांग को शायद ही पूरा किया जाए।

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शाही स्नान और पेशवाई की जगह नहीं बदलेगी
हालांकि शहर से बाहर ले जाने को लेकर कई शंकाओं को दूर करने का प्रयास भी किया गया। इसमें शाही स्नान हरकी पैडी पर ही किए जाने और पेशवाई शहर से निकाले जाने पर सहमति बनी है। लेकिन अखाडों की छावनियां गंगा पार ही स्थापित की जाएगी। इस पर चर्चा चल रही है। क्योंकि अखाडों के पास अपनी जमीन बची नहीं है और शहर की आबादी भी लगातार बढ रही है।

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