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हरिद्वार में कौन खरीद रहा है धार्मिक संपत्तियां, हरीश रावत ने की जांच की मांग

चंद्रशेखर जोशी।
हरिद्वार में धार्मिक संपत्तियों धर्मशालाओं और आश्रमों के​ बिकने और कब्जे किए जाने के मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत ने जांच किए जाने की मांग की है। हरीश रावत ने पहले ट्वीट कर इस तरह की संपत्तियों को खरीदने और बेचने वालों पर कटाक्ष किया और कहा कि हर बार बेचने वालों के नाम एक ही होते हैं और खरीदने वाला व्यक्ति भी एक ही होता है। गौरतलब है कि हरिद्वार में आए दिन आश्रम और धर्मशालाओं के विवाद सामने आते रहते हैं। इन दिनों एक धर्मशाला के बेचे जाने का मामला जोर पकडता जा रहा है। हालांकि अभी ये पुष्टि नहीं है कि ये कथित धर्मशाला बेची गई है या नही।
लेकिन हरीश रावत का ये ट्वीट काफी कुछ कह रहा है। हरीश रावत ने फोन पर बात करते हुए बताया कि हरिद्वार में वे कौन लोग हैं जो धार्मिक संपत्तियों को खरीदने बेचने का काम कर रहे हैं। अगर इन संपत्तियों को गलत तरीके से खरीदा और बेचा जा रहा है तो इस मामले की जांच की जानी चाहिए।

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हरीश रावत ने ट्वीट में जिक्र की गई धर्मशाला के नाम से किया किनारा
हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने जिस धर्मशाला का जिक्र किया, उससे उन्होंने किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि ये सही है कि हरिद्वार में प्रोपर्टी खरीदने और बेचने वाले अमूमन एक ही लोग होते हैं। जिस धर्मशाला का उन्होंने ट्वीट में जिक्र किया, वो नहीं बल्कि दूसरी संपत्ति का मामला है। लेकिन इसकी जांच जरूर होनी चाहिए कि इस एक व्यक्ति के पास इतनी संपत्ति कहां से आ रही है। क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए। हालांकि जब उस व्यक्ति के बारे में और ज्यादा जानना चाहा तो उन्होंने उसका नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरा हरिद्वार जानता है कि हरिद्वार में कौन संपत्तियों को खरीदने को बैचेन रहता है। गौरतलब है कि हरिद्वार में बडी संपत्तियों के सौदों में मध्य हरिद्वार निवासी एक बडे जन नेता के नाम की चर्चा आम हो जाती है। लेकिन अभी तक फलां संपत्ति फिर से जन नेता ने खरीद ली है कि दावे करने वाले नेताओं ने कभी सबूतों के साथ सामने आने की हिम्मत नहीं जुटाई।
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क्या कहते हैं स्थानीय नेता
स्थानीय युवा नेता राम विशाल देव ने कहा कि हरीश रावत हमारे जिम्मेदार नेता है और उन्होंने उत्तराखण्ड में कांग्रेस का वजूद बनाने में बडा योगदान दिया है। उनका धार्मिक संपत्तियों को लेकर दिया गया बयान महत्वपूर्ण है। लेकिन उन्हें इन संपत्तियों को बेचने और खरीदने वालों का नाम भी सार्वजनिक करना चाहिए।

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