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हाथी के बच्चों को गाय का दूध पिलाया तो लग गए दस्त, फिर डॉक्टरों ने निकाला ये तरीका, देखें वीडियो

चंद्रशेखर जोशी।
जंगल में अपने झुंड से बिछुडे हाथी के बच्चों को जिंदा रखने के लिए वन विभाग को खासी मशक्कत करनी पडी। हाथी के बच्चों को गाय के दूध पिलाया गया तो उन्हें दस्त लग गए। डायरिया के कारण बच्चों की हालत लगातार कमजोर होती जा रही थी। ऐसे में वन विभाग के पशु चिकिस्तकों से ऐसी तरकीब निकाली कि हाथी के तीनों बच्चों की जान बच गई। अब तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और बुधवार को इनका नामकरण भी कर दिया गया।
राजाजी पार्क के डायरेक्टर सनातन सोनकर ने बताया कि ढाई साल की रानी को जब चीला रेंज लाया गया था तो वो महज छह माह की थी। हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में रानी अपने झुंड से बिछुड गई थी। कई दिनों तक उसे जंगल ले जाया गया लेकिन किसी भी झुंड ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे चीला रेंज लाया गया और यहां उसे जिंदा रखने की कशमकश शुरू हुई। रानी को गाय का दूध पिलाया गया तो उसे दस्त लग गए। अब हमारे सामने कोई दूसरा रास्ता अपनाने की चुनौती थी। ऐसे में हाथी के बच्चे को जिंदा रखने के लिए इंसान के बच्चे को दिए जाने वाला दूध लेक्टोजन दिया गया। इससे बात बन गई। इसी तरह जब देहरादून वन प्रभाग की बडकोट रेंज से सात माह की जूही और राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज से छह माह के नर हाथी जॉनी को लाया गया तो उसे भी गाय के दूध की जगह लेक्टोजन ही दिया गया। इससे तीनों की सेहत अच्छी हो गई।

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पशु चिकित्सक अनीता शर्मा ने बताया कि गाय के दूध में वसा की मात्रा और इसकी बनावट के कारण हाथी के बच्चे को दस्त लग रहे थे। एसका उपाय निकालने के लिए लेक्टोजन दिया गया। जो कि इंसान के बच्चे को भी दिया जाता है। ये नुस्खा कारगर रहा और आज तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। रानी अब केले और दूसरे भोजन लेने लगी हैं जबकि जूही और जॉनी अभी भी दूध पर ही पल रहे हैं।

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