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आम आदमी को अब तक जेल में ठूंस दिया होता, ग्राम प्रधानों से डर गया प्रशासन

परवेज आलम।
राज्य सरकार के खिलाफ ग्राम प्रधानों ने सोमवार और मंगलवार दोपहर तक रूडकी के विकासखण्ड कार्यालय पर ताला लगाकर रखा। इसके कारण सरकारी काम ठप रहा और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पडा। लेकिन प्रशासन इसे ग्राम प्रधानों की नादानी मानता है और महज चेतावनी देकर इन्हें छोड दिया गया। लेकिन आप जरा सोचिए अगर यही काम किसी आम आदमी ने किया होता तो अभी तक प्रशासन उसे पुलिसिया ​ट्रीटमेंट दिलाकर जेल में ठूंस चुका होता। लेकिन, कानून का डंडा सिर्फ कमजोरों और आम आदमी पर चलता है। सफेदपोशों और रसूखदार लोगों की गलतियां माफ होती हैं। हरिद्वार प्रशासन की कार्यशैली से तो यही लगता है। ये तब है जबकि सोमवार को ही विकासखण्ड अधिकारी मनविंदर कौर ने जिला प्रशासन को तमाम हालातों से लिखित अवगत करा दिया था। मंगलवार सुबह रूडकी के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और उन्होंने समझाबुझाकर ताला खुलवा दिया। अब इस काम को प्रशासन की समझबूझ कहें या फिर तरस खाएं प्रशासन पर जो दो दिनों तक ब्लॉक में ताला लगाए जाने के बाद महज चेतावनी देकर ग्राम प्रधानों को छोड देता है। वो भी उन प्रधानों को जो भारतीय संविधान के अनुसार चुनकर आए हैं और जिन पर कानून का पालन करने की जिम्मेदारी पहली है। लेकिन जब प्रशासन और इसके अधिकारी इतने कमजोर—लचर नजर आए तो कानून का राज होने की बात सोचना भी किसी मुगालते से कम नहीं है। लेकिन, अगर आप सोच रहे हैं कि सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट—काट कर आप परेशान हैं और आप भी इस तरह कार्यालयों में ताला लगा देंगे तो आप कृपया ऐसा मत करना, क्योंकि आप को प्रधानों की तरह चेतावनी नहीं दी जाएगी।

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क्या कहते हैं अधिकारी
मैंने ग्राम प्रधानों को चेतावनी दी कि एक घंटे में ताला खोलो नहीं तो केस दर्ज होगा, इस पर वो मान गए और उन्होंने ताला खोल दिया। आगे से उन्होंने ऐसा काम किया तो केस दर्ज किया जाएगा।
मयूर दीक्षित, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रूडकी।

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मैंने सोमवार को ही लिखित में प्रशासन को अवगत करा दिया गया था। हालांकि प्रधानों ने हमें थोडी मोहलत दे रखी थी। हमें कुछ काम होता था तो प्रधान ताला खोलकर हमें अंदर जाने देते थे।
मनविंदर कौर, ब्लाक विकास अधिकारी।
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कानून को किसी भी सूरत में हाथ में नहीं लेना चाहिए। हमने भी अपने दौर में खूब प्रदर्शन किए। लेकिन इस तरह तालाबंदी नही की। इससे अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पडता बल्कि उलटा जनता परेशान होती है। इस तरह के कार्यों से ग्राम प्रधानों को बचना चाहिए था।
राव आफाक अली, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, ग्राम प्रधान संगठन उत्तराखण्ड।

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