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‘दावेदार: हम अपने नौजवानों को मदन की कैद से आजाद कराने के लिए लड़ रहे हैं’

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजय पालीवाल किसी पहचान के मोहताज नहीं है। वो लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। इस बार वो नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस सीट पर कांग्रेस लगातार हार रही है। उनके पास जीत का क्या रोडमैप है, आइये जानते हैं उनसे….

प्रश्न— पार्टी आपको अपना उम्मीदवार क्यों बनाए। संजय पालीवाल में ऐसा क्या हैं जो आपको पार्टी टिकट दे।

उत्तर— मैं कांग्रेस का पुराना सिपाही हूं। मैं एनएसयूआई से राजनीति की शुरूआत की और युवक कांग्रेस में भी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुका हूं। मैं मुख्य कांग्रेस में भी जिम्मेदार पदों पर रहा हूं। तिवारी सरकार में भी मैं राज्यमंत्री था और इस सरकार में भी मुझे जिम्मेदारी दी गई है। मैं पूरी निष्ठा से पार्टी और जनता की सेवा करता हूं। मैं कभी कांग्रेस से अलग नही हुआ। हालांकि ये पार्टी को तय करना है कि किसको टिकट दिया जाए। फिर भी मैं ये कह सकता हूं कि मैं पार्टी के लिए अच्छा उम्मीदवार साबित हो सकता हूं।
प्रश्न— पहले समय की राजनीति और अब की राजनीति में क्या फर्क आया है।

उत्तर— वो दौर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का था और अब राहुल गांधी का दौर है। ये युवाओं का दौर है। मुख्य अंतर ये है कि अब सोशल मीडिया का जमाना है। प्रचार के माध्यम पुराने जमाने में सीमित थे, लेकिन आज आप पल भर में अपनी बात हजारों—लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इसका सभी राजनीतिक दलों को फायदा हुआ है। ये अच्छा भी है कि आप अपनी बात आसानी से ज्यादा से ज्यादा लोेगों तक पहुंचा रहे हैं।

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प्रश्न— कांग्रेस हरिद्वार नगर सीट पर कांग्रेस के वनवास का कारण क्या है।

उत्तर— ये बात बिल्कुल सही है कि हम इस सीट पर लगातार हार रहे हैं। हाईकमान अगर इस बार सही फैसला लेगी और सही व्यक्ति को जनता के बीच के नेता को अपना उम्मीदवार बनाती है और सभी कांग्रेसी संगठित होकर लड़ते हैं तो कांग्रेस जरूरी जीतेगी। और इसलिए भी कि पिछले पंद्रह सालों में जिस तरीके से विधायक मदन कौशिक ने लोगों को गुमराह किया है, इससे लोगों में रोष हैं और इस बार मदन के खिलाफ है।

प्रश्न— इस सीट पर जीत का समीकरण क्या है, जातीय समीकरण क्या है।

उत्तर— मैं जाति और धर्म की राजनीति पर विश्वास नहीं करता है। जातीय समीकरण पर कांग्रेस कभी यकीन नहीं रखती है। साफ छवि का दमदार उम्मीदवार और संगठित होकर लडाई ही जीत का समीकरण है।
प्रश्न— नगर विधायक मदन कौशिक के कार्यकाल को किस तरह से देखते हैं।

उत्तर— मदन कौशिक पिछले पंद्रह सालों से जीत रहे हैं, लेकिन वो एक भी काम नहीं गिना सकते हैं। एक भी उपलब्धि उनके पास नहीं है। हां युवाओं को जरूर उन्होंने गुमराह कर दिया है। अब हमारी लड़ाई राजनीतिक नहीं रह गई है। बल्कि हम अपने नौजवानों और बच्चों को मदन के कुचक्र से निकालने के लिए लड़ रहे हैं। हम हरिद्वार की मर्यादा को बचाने के लिए मदन से लोहा ले रहे हैं। जो उन्होंने इन 15 सालों में तार—तार कर दी है। जिससे महिलाएं परेशान है और नौजवानों के मां—बाप परेशान है। मदन को हराकर हमें अपनी युवी पीढी को बचाना होगा।
प्रश्न— क्या नीलम हत्याकांड और कुंभ घोटाले जैसे मसलों का कोई वजूद है।

उत्तर— इन सवालों का जवाब आने वाले वक्त में दिया जाएगा।

प्रश्न— आप बहुगुणा कैंप के माने जाते थे। आप उनके साथ कांग्रेस छोड़कर क्यों नहीं गए।

उत्तर— मैं किसी व्यक्तिगत विशेष का आदमी नही हूं। मैंने कभी कांग्रेस नही छोड़ी हैं। मैं जब जिलाध्यक्ष था तो लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन हुआ। मैं वहां नहीं गया, मेरे समय में ही तिवारी कांग्रेस वजूद में आई, लेकिन मैंने पार्टी नहीं छोडी। मैंने कभी किसी पद का लालच नहीं किया। और मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मेरे प्राण कांग्रेस में रहते हुए ही निकलेंगे। मैं कभी कांग्रेस नहीं छोडूंगा।
प्रश्न— हरिद्वार की प्रमुख समस्याएं क्या हैं।

उत्तर— स्वास्थ्य सेवाएं यहां की प्रमुख समस्या है। डॉक्टरों की कमी है, लेकिन हमारी सरकार ने इसे काफी हद तक सही किया, फिर भी सुधार की गुंजाइश है। जलभराव की समस्या थी मध्य हरिद्वार में, वो भी ​हमारी सरकार ने ही काफी हद तक खत्म की है। शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करने की आवश्यकता है। संसाधनों की कमी को दूर किया जाना चाहिए। सफाई व्यवस्था भी बढ़ी चुनौती है। नगर निगम पूरी तरह नाकाम रही है।
प्रश्न— क्या आपको लगता है कि कांग्रेस हरिद्वार में आश्रमों तक कैद होकर रह गई है।
उत्तर— कांग्रेस हमेशा सड़कों पर रही है। आश्रमों की जहां तक बात हैं उनका भी सहयोग चाहिए। सामान्य लोगों का भी सहयोग चाहिए। सभी को कांग्रेस साथ लेकर चल रही है।
प्रश्न— क्या बिना पैसे के चुनाव लड़ा जा सकता है।

उत्तर— हां बिना पैसे के चुनाव लड़ा जा सकता है। इंसान की अपनी व्यक्तिगत छवि ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। अगर पैसे से ही सब कुछ होता तो टाटा बिरला और अंबानी आज देश पर राज कर रहे होते। जमीन पर राजनीति करने वाले को पैसे की जरूरत नहीं होती है।

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