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कोरोना योद्धा डॉक्टरों के सब्र ने जवाब दिया, शहीद हुए साथियों को श्रद्धांजलि दी, जताया विरोध

कुणाल दरगन।
पिछले छह माह से अधिक से कोरोना की जंग लड़ रहे डॉक्टरों की जायज मांगों पर गौर ना करने से डॉक्टरों का सब्र जवाब दे गया है। लगातार चेतावनी देने के बाद भी जब सरकार ने डॉक्टरों की मांगे नहीं मानी तो प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखण्ड के बैनर तले प्रदेश भर में डॉक्टरों ने शाम को कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी जान गंवाने वाले डॉक्टरों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। साथ ही अपनी मांगों को दोहराया गया।
संघ के महासचिव डा. मनोज वर्मा ने बताया कि हमने सरकार के सामने अपनी सिर्फ दो मांगे रखी थी। पहला ये कि डॉक्टरों की एक दिन की वेतन कटौती को बंद किया जाए, दूसरा पीजी अध्यनरत डॉक्टरों को पूर्ण वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर सीमित संसाधनों में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। बावजूद इसके हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीस सितम्बर को कार्यक्रम के अनुसार हमने अपने सा​थियों को श्रद्धांजलि दी है। साथ ही 23 से 30 सितम्बर तक ओपीडी का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वहीं तीस तारीख के बाद बैठक कर अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा।
जिला अस्पताल हरिद्वार के सीएमएस डा. राजेश गुप्ता ने बताया कि कोरोना मरीजों की अपनी जान हथेली पर रखकर हम बिना छुट्टी के काम कर रहे हैं। हमारे कई साथी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं और देश भर में कईयों ने अपनी जान गंवाई है। लिहाजा, सरकार को भी हमारी मांगों को ध्यान देना चाहिए।

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निजी अस्पतालों ने बंद किए दरवाजे लेकिन सरकारी खुले रहे
लॉकडाउन के दौरान जहां निजी अस्पतालों ने मरीजों के लिए कोरोना के डर से अपने दरवाजे बंद कर लिए थे तब सरकारी अस्पताल ही एक मात्र सहारा थे। आज भी जब सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी है। डॉक्टरों की कमी के बावजूद अस्पताल में कोरोना के मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है और दूसरे मरीजों को देखने के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालकर डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं।

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