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हरिद्वार : किशोरी की बुखार के बाद मौत, परिजन होम लॉकडाउन, निजी अस्पताल को जाएगा नोटिस

चंद्रशेखर जोशी।
मध्य हरिद्वार स्थित एक कॉलोनी में 17 साल की लडकी की बुखार के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किशोरी को पिछले एक सप्ताह से बुखार थी और उसे एक निजी क्लीनिक में ले जाया गया था, जहां से उसे ​लक्षणों के आधार पर जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया था।  वहां से उसे एक निजी असपताल में भर्ती होने के लिए भेजा गया था। लेकिन कनखल के इस निजी अस्पताल में ने कथित तौर पर भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद रविवार देर रात उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने सोमवार सुबह उसका अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम तब तक पहुंच नहीं पाई थी। एहतियात के तौर पर उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर के आठ सदस्यों को होम लॉकडाउन कर दिया है। जो लोग अंतिम संस्कार में थे उनकी सूची तैयार कर उन्हें भी होम क्वेरटाइन किया जाएगा। साथ ही उनके सैंपल भी जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। हालांकि राहत भरी बात ये है कि बच्ची या परिवार की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं मिली है।
सीएमओ हरिद्वार डा. सरोज नैथानी ने बताया कि लडकी मानसिक रूप से कमजोर थी औरमिर्गी के दौरे भी पडते थे।  उसका इलाज चल रहा था। करीब एक सप्ताह पहले उसे बुखार की शुरूआत हुई थी। उसे पास ही एक चिकित्सक को दिखाया गया था, जहां से उसे लक्षणों के आधार पर जिला अस्पताल भेजा गया था। हालांकि अभी ये पुष्टि नहीं हुई है कि जिला अस्पताल में कौन से डॉक्टर ने उसे देखा था।  यहां जो मुझे बताया गया है कि एक निजी अस्पताल ने लेने से मना कर दिया था, जो कि एक गंभीर बात है। हालांकि मैं अभी अस्पताल से उनका पक्ष जानने का प्रयास कर रही है। लेकिन अस्पताल की ये दूसरी शिकायत है जब उन्होंने बुखार के मरीज को भर्ती करने से मना किया है। इससे पहले स्वाइन फ्लू के मरीज को भी उन्होंने भर्ती करने से मना किया था।
निजी अस्पतालों का ये व्यवहार समझ से परे है। इसलिए इस मामले की जांच की जा रही है। साथ ही निजी अस्पताल को नोटिस भेजा जाएगा और जांच के बाद कडी कार्रवाई की जाएगी। उनहोंने कहा कि निजी अस्पतालों को आगे आना चाहिए। जहां हमने आइसोलेशन सेंटर बनाया है वहां पुलिस बल की तैनाती की योजना पर विचार किया जा रहा है। ताकि किसी भी मरीज को लौटाया ना जा सके।
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निजी अस्पतालों—नर्सिंग होम सेंटरों ने हाथ खीचें
लॉकडाउन के बाद जिला प्रशासन की ओर से सभी निजी अस्पतालों को अपने यहां फ्लू क्लीनिक खोलने के लिए कहा गया था लेकिन कोई भी निजी अस्पताल अभी तक आगे नहीं आया है। हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग ने आइसोलेशन वार्ड बनाए है। लेकिन वृहद स्तर पर निजी अस्पताल और डॉक्टर अभी भी घर में बैठे हैं।

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निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में ओपीडी खुली रहेगी
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को सीएम आवास में कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए राज्य सरकार हर सम्भव कोशिश कर रही है। इसमें प्राईवेट चिकित्सा संस्थानों का सहयोग बहुत जरूरी है। वर्तमान में दून अस्पताल, महंत इंद्रेश अस्पताल, एम्स ऋषिकेश व हिमालयन अस्पताल में कोविड-19 कोरोना के मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखे गए हैं। यहां के चिकित्सकों को कोरोना के ईलाज मे नियुक्त किया गया है। इससे अन्य निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी बढ गई है। इसलिए सभी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम अपने यहां ओपीडी खुली रखें। ताकि आमजन अन्य बिमारियों की दशा में अपना ईलाज सुगमता से करा सके। सरकार निजी चिकित्सा संस्थानो को हर प्रकार की सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि निजी अस्पतालों में ओपीडी की व्यवस्था सही रखने में सहयोग करें। मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि कोरोना से लङाई में सरकार का पूरा सहयोग किया जाएगा। यह लङाई केवल सरकार की नहीं पूरे देश और समाज की है।
बैठक में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ धनसिंह रावत, मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह, सचिव स्वास्थ्य श्री नितेश झा, एनएचएम के निदेशक श्री युगल किशोर पंत, आईएमए के अध्यक्ष डॉ अजय खन्ना, सीएमआई के चेयरमैन डॉ आरके जैन, डॉ महेश कुडियाल, डॉ अरविंद ढाका, डॉ डीडी चौधरी, डॉ अजीत गैरोला, डॉ सिद्धार्थ गुप्ता, डॉ संजय गोयल, डॉ कृष्ण अवतार, डाॅ प्रवीण मित्तल, डॉ शनवीर बामरा आदि उपस्थित थे।हालांकि, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आईएमए के साथ सोमवार को बैठक कर ओपीडी शुरू करने का आदेश दिया है। ताकि अस्पतालों में कोरोना के अलावा दूसरे मरीजों को इलाज मिल सके।

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