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‘पुराने अपराधियों को नेता बनाने में भाजपा निकली कांग्रेस से आगे’

चंद्रशेखर जोशी, कमल खड़का।
जनपद के ​आपराधिक इतिहास वाले हिस्ट्रीशीटरों को शरण देने में भाजपा कांग्रेस से एक कदम आगे हैं। कुछ महीनों तक कांग्रेस जनपद के हिस्ट्रीशीटरों पर ज्यादा मेहरबान थी, लेकिन हिस्ट्रीशीटर संजय चोपडा और पूर्व सांसद राजेंद्र बाडी के भाजपा में आने के बाद भाजपा के खेमे में हिस्ट्रीशीटरों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा हो गई है। अब जबकि हिस्ट्रीशीटर नाजिम सलमानी की हिस्ट्रीशीट हटाने के लिए कांग्रेस के विधायक फुरकान अहमद कोशिशों में लगे हैं तो दूसरे हिस्ट्रीशीटर भी अपने—अपने आकाओं के जरिए प्रयास कर सकते हैं। वैसे तो हरिद्वार जनपद के 16 थानों में कुल 380 हिस्ट्रीशीटर हैं लेकिन भाजपा और कांग्रेस केवल उन पर मेहरबान हैं जिन्होंने बदमाशी में खूब नाम कमाया है और जिनके खौफ का डंका आज भी चलता है। जबकि अधिकतर पुराने बदमाश जरायम की दुनिया को छोड़कर चाय और अंडे की ठेली जैसे मामूली पेशे से जुडे हैं। लेकिन भाजपा और कांग्रेस को इन हिस्ट्रीशीटरों की भलाई नहीं दिखती है।

 

कितने हिस्ट्रीशीटर हैं जनपद में

एसएसपी कार्यालय से हिस्ट्रीशीटरों के बारे में जनकारी मांगी गई। इसके मुताबिक जनपद के 16 थानों में 380 हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनमें से कई वर्तमान में राजनीति कर रहे हैं। कई प्रोपर्टी डीलर बन गए हैं तो कई चाय, अण्ड की ठेली लगा रहे हैं। कई ऐसे हैं जो धर्म—कर्म के काम में जुड़े हैं। एक वकील भी बना है तो एक पत्रकार भी बन गया है। कई लापता है तो कई सजा भुगत रहे हैं। यहां हम बात सिर्फ राजनीति में आए अतीत के अपराधियों की कर रहे हैं।
कांग्रेस के हिस्ट्रीशीटर

1— रतन सिंह उर्फ बुद्धु पुत्र मेघपाल निवासी विकास कॉलोनी, हरिद्वार।एचएस नंबर— 6 ए, नगर कोतवाली, हरिद्वार।

रतन सिंह को अब रतन सिंह ठाकुर के नाम से जाना जाता है। ये नगर कोतवाली हरिद्वार के हिस्ट्रीशीटर हैं। इनके कारनामों से प्रभावित होकर इन्हें कांग्रेस ने राजनीतिक मंच दिया। हरीश रावत जब हरिद्वार के सांसद थे, तब ये उनके सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे। अक्सर हरिद्वार दौरों के दौरान रतन सिंह सीएम हरीश रावत के रहबर हुआ करते थे। आज भी ये हरीश रावत के खास सिपाही माने जाते हैं। अक्सर ये कांग्रेस के मंचों पर नजर आ जाते हैं।

 

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2— नाजिम सलमानी पुत्र हबीब निवासी मौहल्ला हज्जाबान, ज्वालापुर। एसएस नंबर 109 ए, कोतवाली ज्वालापुर।

नाजिम सलमानी अपने समय का नामी बदमाश रहा है। हत्या के कई आरोप नाजिम पर लगे थे। लंबे समय तक जेल में भी रहे। लेकिन, बाहर आने के बाद काफी समय से सलमानी बिरादारी की राजनीति कर रहे हैं। नाजिम ने 2007 विधानसभा चुनाव में अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाया था। वोटों का धु्व्रीकरण होने के कारण मदन कौशिक को बडी जीत मिली। इनके भाजपा, कांग्रेस और बसपा सभी दलों से संबंध रहे हैंं। लोकसभा चुनाव में इन्होंने कांग्रेस को समर्थन किया था। ये कांग्रेस के कई मंचों पर नजर आ जाते हैं। फिलहाल ये सलमानी बिरादरी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। पूर्व विधायक अंबरीष कुमार गुट के माने जाते हैं। कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद के जरिए हिस्ट्रीशीटर लिस्ट से नाम हटवाने के लिए सोर्स लगवाई।

 

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3— जसवंत पुत्र कांशी राम निवासी बहादराबाद, एसएस नंबर, 62ए। थाना बहादराबाद।

जसवंत कभी नाजिम सलमानी गैंग का अहम सदस्य होता था। लेकिन, नाजिम के साथ ही ये भी जरायम की दुनिया को अलविदा कहकर राजनीति में आ गए। इन्हें पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने आसरा दिया। आज ये भी उनके साथ ही कांग्रेस का दामन थामे हुए हैं। बहादराबाद में इनका भी काफी प्रभाव है। फिलहाल ये कांग्रेस में है और संगठन में प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
4— सोम चौहान पुत्र इकमल सिंह निवासी सीतापुर ज्वालापुर, एचएस नंबर 92 ए, कोतवाली ज्वालापुर।

ज्वालापुर कोतवाली का ये हिस्ट्रीशीटर राजनीति में आने के बाद मंडी समिति ज्वालापुर के अध्यक्ष भी बने। सोम चौहान भाजपा में लगातार सक्रिय रहे। ये भी अपने समाज के बडे नेता के तौर पर जाने जाते हैं। हाल ही में इन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
भाजपा के हिस्ट्रीशीटर

1— मनोज चौहान पुत्र सुरेंद्र निवासी पंजनहेडी, थाना कनखल। एचएस नंबर 31 ए, थाना कनखल।

मनोज चौहान भी कनखल थाने का हिस्ट्रीशीटर है। लेकिन, इनकी नई पहचान खनन—चुगान समिति के जरिए हैं। ये खनन कारोबार को संगठित करके चलाते हैं। खनन जैसे मुनाफे के धंधे से जुडे इस हिस्ट्रीशीटर से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही नेताओं के संबंध है। लेकिन ये विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की राजनीति करते हैं।

 

2— राजेंद्र बाडी पुत्र गंगादीन निवासी पूर्वी अंबर तालाब, रूडकी। एचएस नंबर— 10 बी, थाना रूडकी।

राजेंद्र बाडी कभी सट्टा कारोबारी हुआ करते थेे। पुलिस ने इनके पास से हजारों पर्चियां पकड़ी होगी। लेकिन जनता की अदालत में ये पास हुए और लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद जा पहुंचे। फर्श से अर्श के इस सफर में सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा कांग्रेसी नेता अंबरीष कुमार का काफी योगदान रहा। अंबरीष ने 2004 के अर्धकुंभ में हुई लाठीचार्ज का फायदा उठाकर मैदानी मूल के लोगों की भावनाओं को कैश करा लिया था। राजेंद्र बाडी को सपा ने खादी पहनने का मौका दिया था। हाल ही में इनकी काबलियत और हुनर को भाजपा ने पहचान लिया। अब ये भाजपा के लिए वोट जुटा रहे हैं।

 

3— सुशील चौहान पुंत्र इसम निवासी खेडली, थाना बहादराबाद। एचएस नंबर— 60ए, थाना बहादराबाद।

सुशील चौहान को सुशील खेडली के नाम से जाना जाता है। इनके प्रभाव को भाजपा ने कैश किया। इन्हें किसान कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया और बाद में भाजपा का जिलाअध्यक्ष भी बनाया। चौहान बिरादरी पर भी इनका बहुत प्रभाव है। यही कारण है कि भाजपा को चौहान जाति का वोट और सपोर्ट मिलता आ रहा है। ये अपने क्षेत्र के कद्दावर नेता माने जाते हैं।
4— प्रताप पुत्र हरीश चंद्र निवासी बहादराबाद, एचएस नंबर, 65ए, थाना बहादराबाद।

बहादराबाद का एक ओर हिस्ट्रीशीटर प्रताप पाल राजनीति में सक्रिय है। अपनी पत्नी को पंचायत राजनीति में उतारा और खुद राजनीति तौर पर स्थपित हो गए। ये भी नाजिम सलमानी के साथ हुआ करते थे और अब नाजिम के पदचिन्हों पर चलते हुए ही राजनीति में आ गए। इन्हें भी पूर्व विधायक अंबरीष कुमार का समर्थन हासिल था। ये फिलहाल भाजपा मे हैं।

 

 

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5— संजय चोपड़ा उर्फ संजू पुत्र गोविंद लाल निवासी विष्णुघाट, हरिद्वार।
एचएस नंबर — 12 ए, नगर केातवाली हरिद्वार।

संजय चापेड़ा नाम से तो आप वाकिफ ही होंगे। भाईगिरी करते—करते संजय चोपड़ा फुटपाथ पर ठेला, खोखा लगाने वाले लोगों के मसीहा बन गए। लंबे समय तक खोखा पटरी नेता के तौर पर संघर्ष किया। इसी के साथ कांग्रेस ने इनके टेलेंट को भी पहचान लिया। इन्हें भी संजू से आदरणीय संजय चोपडा बना दिया। हाल ही में ये मंडी समिति के अध्यक्ष बने। अपने गुरु हरक सिंह रावत के कांग्रेस छोड़ने के साथ ही ये भी कांग्रेस को छोड़ भाजपा में आ गए। भाजपा ने भी इनके पुराने रिकार्ड को खंगालने की जरूरत नहीं समझी और आज से भाजपा के बैनर तले कांग्रेस से दो—दो हाथ कर रहे हैं। उसी कांग्रेस से जिसने इन्हें खादी पहनने का मौका दिया था।

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