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साढ़े तीन हजार करोड़ में होगा देश का जल प्रबंधन

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साढ़े तीन हजार करोड़ में होगा देश का जल प्रबंधन
एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना को लागू करने की मंजूरी दे दी। यह केन्द्रीय परियोजना है और इसके लिए 3679.7674 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए है। इसमें 3,640 करोड़ रुपए राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना (एनएचपी) के लिए और 39,7674 करोड़ रुपए राष्ट्रीय जलसूचना केन्द्र (एनडब्ल्यूआईसी) के लिए रखा गया है। इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। एनडब्ल्यूआईसी जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत स्वतंत्र संगठन होगा।
राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना से जल-मौसम विज्ञान संबंधित डाटा एकत्रित करने में मदद मिलेगी और इसका वास्तविक समय के आधार पर विश्लेषण किया जाएगा। इसे राज्य/जिला/गांव स्तर पर देखा जा सकता है। यह परियोजना पूरे देश को कवर करेगी, पहले की जलविज्ञान परियोजनाएं केवल 13 राज्यों को कवर करती थीं।

ये होंगी विशेषताएं
क.) यथावत जल-मौसम निगरानी प्रणाली तथा जल-मौसम डाटा अधिग्रहण प्रणाली।

ख.) राष्ट्रीय जल सूचना केन्द्र की स्थापना।

ग.) जल संसाधन संचालन तथा प्रबंधन प्रणाली।

घ.) जल संसाधन संस्थान तथा क्षमता सृजन।

कुल आवंटन में से 50 प्रतिशत राशि यानी 1839.8837 करोड़ रुपए विश्व बैंक से ऋण के रूप में मिलेगा, जिसका पुनः भुगतान केन्द्र सरकार करेगी। शेष 50 प्रतिशत राशि यानी 1839.8837 करोड़ रुपए बजटीय समर्थन से केन्द्रीय सहायता के रूप में मिलेगी।

विश्व बैंक की ऋण राशि तथा राज्यों और केन्द्रीय संगठनों को मिलने वाली केन्द्रीय सहायता अनुदान के रूप में दी जाएगी।

क्या है परियोजना
राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना का उद्देश्य (नेशनल हाइड्रोलोजी प्रोजेक्ट –एनएचपी) विश्वसनीय और समयबद्ध ढंग से जल संसाधन से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, भंडारण, मिलान और प्रबंधन करना है। यह परियोजना जल संसाधनों के आकलन, बाढ़ प्रबंधन, जलाशय प्रबंधन, सूखा प्रबंधन आदि के लिए डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के जरिये उचित फैसला करने जरिया/व्यवस्था मुहैया कराएगी। एनएचपी सूचना व्यवस्था और आधुनिक तकनीक जैसे रिमोट सेंसिंग के जरिये राज्य और केंद्रीय सेक्टरों के संगठनों में जल संसाधन प्रबंधन में क्षमता निर्माण में मदद करेगी। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने जल प्रबंधन के प्रबंधन में परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने नदी बेसिन से जुड़े नजिरये को अपनाकर इस दिशा में परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। देश में बेहतर तरीके से जल संसाधन का इस्तेमाल और प्रबंधन, पर्याप्त आंकड़े, संसाधन आकलन, डीएसएस आदि तेजी से घटते जल संसाधन के बेहतर आवंटन और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए जरूरी है।

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