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नेशनल हेल्थ मिशन भर्ती में गोलमाल

National health missionनेशनल हेल्थ मिशन भर्ती में “गोलमाल”
– सीएमओ, अधिकारी, कर्मचारियों के रिश्तेदार चयनित
– 26 मार्च को विज्ञापन दिया और 29 को इंटरव्यू कराए

एमएस नवाज, एसके तिवारी।
नेशनल हैल्थ मिशन एनएचएम भर्ती में बड़ी धांधली सामने आई है। हरिद्वार में एनएचएम के 30 पदों पर हुई भर्ती में सीएमओ, अफसरों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों व अपने चहेतों का चयन कर लिया गया। इतना ही नहीं 30 में से 23 पदों के लिए विज्ञापन 26 मार्च को अखबार में प्रकाशित हुआ और 29 को इंटरव्यू कर अगले ही दिन इंटरव्यू का परिणाम भी जारी कर दिया गया। आनन—फानन में भर्ती इसलिए भी की गई, क्योंकि 31 मार्च को तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुषमा गुप्ता को रिटायर होना था। भर्ती प्रक्रिया में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और किस आधार पर अपने रिश्तेदारों को चयनित किया गया, इन सवालों पर अब अधिकारी चुप्पी साध गए हैं।

नेशनल हैल्थ मिशन के तहत हरिद्वार में 18 कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके लिए सीधे केंद्र ये बजट आता हैं। एनएचम के सात पदों के लिए आठ फरवरी 2016 को विज्ञापन निकाला गया था। विज्ञापन की शर्तों के अनुसार अभ्यर्थियों को अपने तमाम दस्तावेज सीएमओ कार्यालय भेजने थे। इसका इंटरव्यू 28 मार्च 2016 को तय किया गया। इसी बीच सीएमओ कार्यालय ने 23 अन्य पदों के लिए आनन—फानन में 26 मार्च 2016 को दैनिक अमर उजाला अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया और 29 मार्च 2016 को इंटरव्यू की तारीख भी तय कर दी गई। दोनों ही भर्तियों में वर्तमान सीएमओ की बेटी, अपर शोध अधिकारी की पत्नी, एक सीएमएस की रिश्तेदार, चतुर्थ कर्मचारी का भाई और स्वास्थ्य विभाग से हाल ही में रिटायर हुए कर्मचारी और अपने—अपने चेहेतों का चयन कर लिया गया। सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर 23 पदों के नियुक्ति के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। जबकि नियमानुसार अखबार में विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद कम से कम दस दिन का समय दिया जाना जरूरी होता है।

ये हैं अधिकारी, कर्मचारियों के रिश्तेदार जो चयनित हुए
डिस्ट्रिक्ट कंसल्टेंट के पद पर वर्तमान सीएमओ डॉ. आरती ढोंढ़ियाल की बेटी जया ढोंढ़ियाल, सोशल वर्कर एनटीसीपी में सीएमओ कार्यालय में ही तैनात अपर शोध अधिकारी विनोद कुमार की पत्नी विनोद कुमारी का चयन हुआ। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नेता मनोज चंद के भाई सतीश ठाकुर का चयन लैब अटेंडेंट के पद पर इसी तरह हाल ही में स्वास्थ्य विभाग से रिटायर हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का सोमप्रकाश का चयन भी इसी पद के लिए कर लिया गया। वहीं दूसरी ओर एक सीएमएस की रिश्तेदार का भी चयन इसी भर्ती में हुआ। चूंकि, इस बारे में हमारी जांच पूरी नहीं हो सकी, इसलिए हम उस सीएमएस और भर्ती हुई अभ्यर्थी का नाम नहीं लिख रहे हैं। इसी तरह कई ओर भी हैं जो अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किसी ना किसी संबंध होने के चलते लाभ पाने में कामयाब रहे।

इंटरव्यू पैनल में भी अनियमितता
इंटरव्यू का पैनल चयन करने में भी अनियमितता बरती गई। इंटरव्यू पैनल में ना तो ओबीसी, एससी और एसटी, अल्पसंख्यक सदस्य को नहीं रखा गया। कम्पयूटर के ज्ञान के लिए एनआईसी के किसी सदस्य को बुलाने के बजाए सीएमओ कार्यालय के ही डाटा एंट्री आॅपरेटर को सवाल पूछने के लिए बिठा दिया गया। वहीं लैब टैक्नीशियन के पदों पर भर्ती के लिए सीनियर पेथोलॉजिस्ट को बुलाने के बजाए संविदा पर कार्यरत पेथोलॉजिस्ट को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।

क्या कहते हैं अधिकारी

चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई। हमने 23 मार्च को हिंदुस्तान अखबार में विज्ञापन प्रकाशित किया था, लेकिन अमर उजाला में विज्ञापन 26 मार्च को प्रकाशित हुआ। इसमें हमारी ओर से कोई गड़बड़ी नहीं की गई। सभी आरोप बेबुनियाद हैं। अगर कोई कमी रह गई है तो भर्ती को निरस्त कर देना चाहिए।
डॉ. सुषमा गुप्ता, तत्कालीन सीएमओ, हरिद्वार।

भर्ती मेरे समय नहीं हुई और मैं इंटरव्यू के पैनल में भी नहीं थी। शिकायत पर जांच कराई जाएगी।
डॉ. आरती ढोंढ़ियाल, प्रभारी सीएमओ, हरिद्वार।

मैं सिर्फ इंटरव्यू पैनल में था, इसके अलावा मैं कुछ नहीं बता सकता। सब सीएमओ स्तर से हुआ है और मैंने आदेशों का पालन किया है।
डॉ. केसी ठाकुर, नोडल अधिकारी, एनएचएम, हरिद्वार।

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