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भगवान शिव का जाप करने से मिलती है कष्टों से मुक्ति : महामंडलेश्वर नवल किशोर दास

राकेश वालिया।
श्री हनुमंत धाम आश्रम में तृतीय वार्षिक उत्सव व भण्डारे का आयोजन किया गया। वार्षिक उत्सव में संत सम्मेलन आयोजित किया गया। तृतीय वार्षिक उत्सव पर शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा में संत महंतों ने हिस्सा लिया। संत सम्मेलन में संत महंतों ने अपने विचार रखे। आश्रम के परमाध्यक्ष महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 नवल किशोर दास रामायणी ने कहा कि तृतीय वार्षिक उत्सव प्रतिवर्ष धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस उत्सव का महत्व बढ़ गया है क्योंकि शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान शिवा के नाम मात्र जाप करने से ही कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। भगवान शिव की कृपा बनी रहे तो परिवारों में सुख समृद्धि का वास बना रहता है। हमें भगवान शिव की आराधना विधि विधान के साथ करनी चाहिये। महंत रामलखन दास ने संत सम्मेलन में पधारे संत महंतों का आभार जताया और कहा कि गुरू परम्पराओं का निर्वाह ठीक रूप से करना चाहिये। धर्म के अनुसार किये गये कार्य सदैव ही प्रसिद्धि को बनाये रखते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की शक्ति अपरम्पार हैं। हमें भगवान शिव की अराधना मन से करनी चाहिये। मन से की गई प्रार्थनायें मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। आचार्य पंडित कमलभान मिश्रा ने तृतीय वार्षिक उत्सव की शुभकामनायें दी। शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन को प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि मुझे अत्यधिक प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। भगवान शिव सभी का कल्याण करते हैं। मुख्य यजमान श्रीमती बृजरानी शर्मा एवं टी0सी0 शर्मा ने संत—महंतों का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि गुरू के बताये मार्गो पर चलकर अपने जीवन को सुखद बनाये गुरू सदैव ही शिष्यों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। हमें मनुष्य कल्याण के लिए तत्पर रहना चाहिये। श्री हनुमंतधाम आश्रम में मनुष्य कल्यााणकारी कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। म0म0 नवल किशोर दास जी सदैव ही भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उनके द्वारा गरीब असहाय दीन दुखियों को मदद पहुंचाने का कार्य किया जाता है। संत सम्मेलन में महंत श्यामदास, महंत परमेश्वर दास, स्वामी राघवानंद, महंत लखनदास, बाबूलाल अग्रवाल, स्वामी त्रिभुवनदास, महंत भगवानदास, महंत रघुवीरदास, महंत विष्णुदास, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी चिद्विलासानंद, स्वामी जगदीशनंद आदि संत सम्मेलन में मुख्य रूप से सहयोग करने वालों में कुसुमलता सत्यप्रकाश गोयल आदि रहे।

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