Jyotish

“संतों को राजनीति से अलग रहना चाहिए”

IMG-20160414-WA0025

“संतों को राजनीति से अलग रहना चाहिए”
ब्यूरो
संस्कृत, वेद और शास्त्रों के प्राख्यात विद्ववान और दक्षिण काली पीठ मंदिर के महंत और अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी के लाखों भक्त हैं। उनके भक्तों में यूपी के पूर्व सीएम और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंहं यादव और उनके भाई भी शामिल हैं। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता उनके परमभक्त हैं। उनके बारे में और वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों पर स्वामी कैलाशानंद क्या सोचते हैं। उनसे बातचीत की हमारे वरिष्ठ सहयोग एसके तिवारी ने।

सवाल : आपके पास हर पार्टी के नेता आते हैं। क्या आपने भी कभी राजनीति में जाने के बारे में विचार किया है।

जवाब : हां, ये सही है कि मेरे मुलायम सिंह यादव, उनके भाई शिवपाल सिंह यादव और परिवार के सभी सदस्यों से धार्मिक और आध्यात्मिक संबंध हैं। भाजपा, कांग्रेस और कई दूसरी पार्टी के बड़े नेता मेरे पास आते हैं। लेकिन मेरा उनसे कभी कोई राजनीतिक संबंध नहीं रहा और ना ही कोई राजनीतिक चर्चा होती है। जहां तक राजनीति का सवाल है मेरा मानना है कि धर्म से जुड़े लोगों को राजनीति में नहीं  जाना चाहिए। वर्तमान में राजनीति का स्वरूप बदला है, इसलिए राजनीति धर्मगुरुओं के बस की नहीं है। इससे परहेज ही करना चाहिए। मैं भी कभी राजनीति में नहीं जाउंगा।

सवाल : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि शनि की पूजा महिलाओं को नहीं करनी चाहिए। आपकी इस पर क्या राय है।

जवाब: देखिए मैं आदरणीय शंकराचार्य महाराज का बहुत आदर करता हूं। उनका हर आदेश सर आंखों पर हैं, लेकिन शनि की पूजा महिलाओं को नहीं करनी चाहिए। इस पर मेरी राय थोड़ी अलग है। शनि की पूजा गृह के रूप में की जा सकती हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। ऐसा किया जा सकता है, महिलाएं भी इसकी पूजा कर सकती है।

सवाल : अर्धकुंभ में इतने बड़े पैमाने पर खर्चा किया गया है, क्या ये सही है और आप इस बारे में क्या सोचते हैं।

जवाब : हरिद्वार में लगने वाले अर्धकुंभ में अखाड़े नहीं आते हैं। इसलिए भक्तों का रूझान भी ज्यादा नहीं रहत है। मैंने पहले ही प्रशासन को इस बारे में बताया था कि इतने बड़े स्तर पर तामझाम करने की जरूरत नहीं हैं। इस बारे में भविष्य में सोचा जाना चाहिए। ये फिजूल खर्च नहीं होना चाहिए।

सवाल : ब्रह्मकुंड कहां हैं क्या हरकी पैडी का विस्तार होना चाहिए। ताकि कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में दिक्कत ना हो।

जवाब : कुछ लोग कहते हैं कि ब्रह्मकुंड हरकी पैडी पर है। लेकिन मेरा मानना है कि ब्रह्मकुंड पर एक बहस होनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार चर्चा होनी चाहिए। ब्रह्मकुंड नीलधारा में हैं या कहीं ओर इस पर चर्चा की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि हम नीलधारा के तट पर स्थित हैं और शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने गंगा की इस धारा में ही स्नान किया था, इसके बाद इसे नीलधारा कहा जाने लगा। और शास्त्रों में स्नान के लिए तीन जगह का उल्लेख है, कुशा घाट, बिल्केश्वर महादेव जहां अब गंगा नहीं बहती है और नीलधारा में। लिहाजा, इस बारे में चर्चा तो होनी चाहिए। जहां तक सवाल है हरकी पैडी के विस्तार की, लगातार आबादी बढ़ रही हैं। इसलिए प्रशासन को मेले आयोजित करने के लिए नया स्थान तो तलाशना होगा और नीलधारा क्षेत्र इसके लिए सही साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.